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सनातन धर्म और हम

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हमारे सनातनी पूर्वजों ने कितने श्रमसाध्य शिल्पकारी को इतने कुशलता और निपुणता पूर्वक अपने इतिहास को पाषाण पर मूर्तियों/चित्रों के रूप में लिख दिया है जो यह किसी अन्य किताबी मज.हब में देखने को नहीं मिलता है। इस पाषाण कृतियों को देखकर वामियों/भीमटों का यह दुष्प्रचार कि ब्राह्मणों ने अन्य जातियों को धर्मग्रंथों को पढ़ने से वंचित रखा था, भी खंडित हो जाता है। इस मूर्ति को ज़ूम कर ध्यानपूर्वक देखें.!! (चित्र-साभार) इसमें रामायण (अरण्यकाण्ड) के एक कथा का सम्पूर्ण चित्रण किया गया है। अब विचार करें कि यदि ब्राह्मणों ने अन्य जातियों को धर्मग्रंथ नहीं पढ़ने दिया तो इस सनातनी शिल्पकार ने इतने विस्तार पूर्वक वर्णन सहित इस प्रतिमा का निर्माण किस प्रकार किया.?? क्योंकि प्रत्येक छोटी छोटी बातों को इतने सटीकता से ग्रँथ को पढ़े बिना निर्माण करना असंभव है। इस चित्र में कबन्ध (अर्थात धड़ नेतृत्वहीन) दानव के प्रभु श्री राम के हाथों मुक्ति की कथा को चित्रित किया गया है। कबन्ध दानव वास्तव में एक गन्धर्व था। उसका नाम विश्ववासु था। यह श्री नामक अप्सरा का पुत्र था। विश्ववासु ने अपने तपश्चर्या द्वारा सृष्टिकर्ता ब्रह्...