सनातन धर्म और हम
यह भक्ति की शक्ति ही है जो एक मानव का रूपांतरण महामानव में कर देता है। भक्ति में भक्त अपने को सम्पूर्ण समर्पित कर आराध्य देव को प्राप्त कर लेता है। यह भक्ति की शक्ति और आराध्य देव के प्रति समर्पण ही है जो उसके कार्य में भगवान के अनुग्रह से दिव्यता का सम्मिश्रण हो जाता है। ग्रेनाइट का MOHS SCALE में कठोरता ८ है जबकि सबसे कठोरतम हीरा का MOHS SCALE में कठोरता १० है। आज आधुनिक युग में लेजर उपकरण के द्वारा भी ग्रेनाइट पर शिल्पकला अत्यंत कठिन है। किन्तु सहस्रों वर्ष पूर्व सनातनी शिल्पकारों ने बिना आधुनिक तकनीक के इस नन्दी का निर्माण अपने हाथों से किया है। यह नन्दी महाराज, रामप्पा मन्दिर, वारंगल जनपद, तेलंगाना। यह नन्दी एक ही अखण्ड पाषण शिला ग्रेनाइट से बना है। इस नन्दी के प्रतिमा पर कहीं भी "छेनी-हथौड़ी" का कोई चिह्न दिखाई देता है क्या.?? ऐसी स्निग्धता सतह पर लाने में कितना श्रम, समय और निपुणता लगा होगा इसकी कल्पना करें.!!!! इनके ऊपर निर्मित आभूषणों की सूक्ष्मता में एक छोटी सी चूक सम्पूर्ण प्रतिमा को कुरूप कर सकता था। परन्तु उन सनातनी पूर्वजों के धर्म और कला के प्रति समर्पण और धैर्य...