सनातन धर्म

दक्षिण का कैलाश (वल्लीअंगिरी पर्वत) समुद्रतल से १००० मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

लोगों का ऐसा विश्वास है कि जो इन पर्वतों पर चढ़कर भगवान शिव के दर्शन करते हैं उन्हें कैलाश मानसरोवर से समान तृप्ति, सन्तुष्टि, आंनद और पुण्य प्राप्त होता है।

पुराणों में वर्णन है कि पराशक्ति का अवतार देवी कन्याकुमारी के रूप में भगवान शिव की पत्नी बनने के लिए हुआ।

उन्होंने ने यह प्रतिज्ञा लिया कि एक निश्चित समय में प्रभात होने से पूर्व ही भगवान शिव से उनका विवाह हो यदि ऐसा नहीं होता तो वे अपने काया को समाप्त कर लेंगी।

यही प्रतिज्ञा कर उन्होंने तपस्या प्रारंभ किया।

परमपिता देवाधिदेव शिव उनके तपस्या से प्रसन्न हो उनसे विवाह के लिए कैलाश से दक्षिण दिशा में प्रस्थान किए। 

परंतु बहुत सारे लोग इस विवाह के विरुद्ध थे और विवाह रोकने के लिए व्यवधान करने लगे।

इसी षड्यंत्र में छल से उन्होंने बहुत से कर्पूर जला कर प्रभात होने का भ्रम पैदा कर दिया।

इस भ्रम में कि वह पवित्र मुहूर्त व्यतीत हो गया, भगवान शिव अत्यंत व्यथित हो वापस लौटने लगे।

लौटने के क्रम में भगवान शिव वल्लीअंगिरी पर्वत पर विश्राम किए।

इस प्रकार इसे दक्षिण के कैलाश या 'थेँक्लायं' कहा गया।

यहाँ भगवान शिव के स्वयम्भू विग्रह हैं।

इसके अतिरिक्त देवी कन्याकुमारी भी यहाँ स्थित हैं।

यहाँ तक पहुंचने के लिए समुद्र तल से ६००० फीट ऊंची पहाड़ों को पार करने के पश्चात भगवान शिव के दर्शन होते हैं।
(चित्र - साभार)

महान सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय माँ कन्याकुमारी 🙏🌺

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम