सनातन धर्म
जब देवी सती ने राजा दक्ष प्रजापति से अपमानित हो आक्रोश में यज्ञकुंड में प्रवेश कर अपना आत्मदाह कर लीं थीं।
परमपिता भगवान शिव विरह वेदना और संताप के वशीभूत हो उनके शव को अपने कंधे पर उठा रुद्रताण्डव करने लगे।
सम्पूर्ण सृष्टि त्राहिमाम कर उठी।
तब सृष्टि की संरक्षा हेतु भगवान श्री विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी के शव को अनेक खण्डों में विभाजित कर दिए।
जहाँ - जहाँ वे खण्ड पृथ्वी पर गिरे वहाँ शक्तिपीठों की स्थापना हुई।
कुल ५१ शक्तिपीठ हैं।
देवी के नाभि का खण्ड जहाँ गिरा वहाँ एक वैभवपूर्ण भव्य मन्दिर हैं।
काँची कामाक्षी अम्माँ मन्दिर वही शक्तिपीठ हैं जहाँ देवी सती का नाभि-खण्ड गिरा था।
यह मन्दिर काँचीपुरम के मध्य में स्थित है।
(चित्र - साभार)
काँची कामाक्षी अम्माँ मन्दिर, काँचीपुरम, तमिलनाडु।
इस अद्वितीय मन्दिर का निर्माण पल्लव नरेशों ने लगभग १७०० वर्ष पूर्व करवाया था।
काँचीपुरम पल्लव राजाओं की राजधानी रहा है।
ऐसी मान्यता है कि मन्दिर आदिकाल से ही यहाँ है और इस मन्दिर में जगतगुरु आदिशंकराचार्य ने श्री-चक्र की स्थापना किए थे।
सम्पूर्ण मन्दिर लघु मूर्तियों, कलाकृतियों से भरी पड़ी है और यह आश्चर्य होता है कि क्या इतनी स्पष्टता से ये निर्माण मानव हाथों से सम्भव है.?? (Zoom करके देखें)
निर्माणकर्ता सनातनी पूर्वजों को नमन है.!
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय माँ मीनाक्षी 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा
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