सनातन धर्म

इन दोनों चित्रों में बने कलाकृतियों को ध्यान से देखें.!!

अब इन दोनों के कलाकृतियों की तुलना करें.!!

दोनों ही में पूर्ण समानता दिखाई देते हैं।

ये कलाकृतियाँ कल्पतरु या कल्पवृक्ष की हैं जो मुख्यतः सनातन धर्म, जैन, व बौद्ध लोगों के आस्था का प्रतीक है और सनातनी, जैन व बौद्ध धर्म के मन्दिरों में निर्मित/उकीर्ण पाए जाते हैं।

पवित्र कल्पतरु के चित्र :-
(चित्र-साभार)

१. चित्र - दिलवाड़ा जैन मन्दिर, माउन्ट आबू, राजस्थान।

२. चित्र - जामी मस्जिद, चम्पानेर, गुजरात।

दिलवाड़ा जैन मन्दिरों का निर्माण चालुक्य वंश के शासकों द्वारा ग्यारहवीं शताब्दी से तेरहवीं शताब्दी के मध्य करवाया गया था।

इस मन्दिर का निर्माण चालुक्यराज विमल शाह ने करवाया था।

इस मन्दिर की रूपरेखा ढोकला जैन मंत्रियों, वस्तुपाल-तेजपाल द्वारा बनाया गया था।

दिलवाड़ा जैन मन्दिर नागर शैली में निर्मित और संगमरमर पर जटिल कलाकृतियों के लिए अद्वितीय निर्माण है।

इसी दिलवाड़ा जैन मन्दिर में श्वेत संगमरमर पर बने पवित्र कल्पवृक्ष का प्रथम चित्र है।

यह दूसरा चित्र एक मस्जिद जो इस्लामी स्थल होता है, में यह है। यह पवित्र कल्पवृक्ष जामी मस्जिद, चम्पानेर, गुजरात में है।

कहा जाता है कि महमूद बेगड़ा ने हिनूओं के भीषण रक्तपात के उपरांत कई हीनू किले जीतने के पश्चात इस ^स्जिद का निर्माण करवाया था।

अब सबसे कठिन प्रश्न है कि जो पवित्र कल्पवृक्ष सनातन धर्म संस्कृति के हैं वो एक इ^लामी संरचना में कैसे निर्मित है.??

सम्पूर्ण विश्व के किसी भी ^स्जिद में पवित्र कल्पवृक्ष नहीं है। यदि है तो बताइए...??

कुछ वर्णसंकर हरे रंग के रक्त वाले कथित इतिहासकार इसे "भाई-चारे" के रूप में निर्माण भी कह सकते हैं, परन्तु क्या यह सम्भव है.??

निर्णय आप पर छोड़ता हूँ.......कि इन दोनों पवित्र कल्पवृक्ष में समानता क्या इंगित करता है....!!

दुर्लभ सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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