सनातन धर्म
सनातन धर्म में सृजनात्मकता अंतर्निहित है।
सृजनशीलता वह आधार है जो सनातन धर्म के अतिरिक्त अन्य किसी "किताबी" पंथ में नहीं मिलता है।
सहस्रों वर्षों तक विधर्मियों, म्लेच्छों, लुटेरों, आक्रांताओं, आक्रमणकारियों के द्वारा विखण्डित/भग्न/ध्वस्त किए जाने के पश्चात भी सृजन की जीवटता समाप्त नहीं हुई।
सनातन धर्म के प्रतिष्ठानों में जो भी उत्कीर्ण हैं वह मात्र धार्मिक प्रतीक नहीं है अपितु सम्पूर्ण समाज के सांस्कृतिक/धार्मिक/सामाजिक और व्यावसायिक क्षेत्रों के परिदृश्यों का चित्रण है।
इन चित्रों के जूम(zoom) करके देखें..!!
क्या मूर्तियों, आकृतियों, संरचनाओं को देख आप किसी सम्मोहन शक्ति का अनुभव कर रहे हैं.?? यही है सनातनी शिल्पकारों के कला निपुण हाथों का चमत्कार.!!
ये सभी चित्र चूली जैन मन्दिर, हलवाड़-धनगढ़रा उच्च पथ, गुजरात के हैं।
(सभी चित्र-साभार)
ये सभी चित्र मन्दिर के बाहरी निर्माण के हैं। मन्दिर के अंदर की Photography प्रतिबंधित है।
जब मन्दिर के बाहर का निर्माण इतना सौंदर्यपूर्ण है तो अंदर का निर्माण कितना नयनाभिरामी और मनमोहन होगा यह स्वयं कल्पना किया जा सकता है।
सनातन शिल्प कला में उत्कृष्टता स्वस्फूर्त होते हैं। इसके लिए अतिरिक्त प्रयास की आवश्यकता नहीं होता है।
इन अतुलनीय दृश्यों को देखें और कल्पनालोक में खो जाएँ.!!
अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!
अपने सभी सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ.!!
जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा
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