सनातन धर्म
शास्त्र केवल शब्दों में नहीं मन्दिरों में भी गढ़े पड़े है।
सनातन धर्म को मिटाने की इच्छा रखने वालों वामजीवियों को यह जान लेना चाहिए कि हमारा अस्तित्व मिटा पाना तुम्हारे लिए संभव नहीं है।
तुमने इतिहास में अपने स्वार्थ अनुकूल परिवर्तन कर दिए, तब भी हमारा इतिहास और भविष्य इन मन्दिरों में गढ़ा पड़ा है।
यह श्री मीनाक्षी अम्माँ मन्दिर है।
(चित्र - साभार)
माना जाता है की यहाँ माता पार्वती जी और परम् पिता महादेव का विवाह सम्पन्न हुआ था।
यह मंदिर स्वयं देवराज इंद्र ने बनवाया था, और इसके निर्माणकर्ता स्वयं देवशिल्पी विश्वकर्मा रहे हैं।
इस मन्दिर में अब कुछ विशिष्ट बातें देखिये --
त्रेता युग के अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम जी का चित्रण किया गया है।
उसी में आप गदाधारी आञ्जनेय हनुमानजी की मूर्ति देखें।
वे वानररूप में नहीं अपितु मानव रूप में हैं।
प्रभु श्रीराम जी की धोती का रंग भी पीला है, पीला रंग सूर्य का प्रतीक है। श्रीराम सूर्यवंशी थे।🌞
द्वापर के दूसरे अवतार लीलाधर श्रीकृष्ण हैं।
लीलाधर श्रीकृष्ण के मस्तक पर चन्द्रमा विराजमान है, जो उनके चन्द्रवंशी अवतार होने के कारण है।🌙
परंतु श्रीकृष्ण के हाथ में कोई शस्त्र नहीं है और महाभारत के निर्णायक युद्ध में भी यही हुआ था।
भगवान श्रीकृष्ण शस्त्र नहीं उठाए थे।
इनकी धोती का रंग श्वेत है। श्वेत रंग चन्द्र का प्रतीक है, श्री कृष्ण चन्द्रवंशी थे।🌙
कलयुग के तीसरे अवतार को आप देखिए, माथे पर चन्द्रमा है।
कल्कि अवतार के बारे में कहा जाता है कि वे ब्राह्मण के घर उत्पन्न होंगे।
ब्राह्मण चन्द्र उपासक होते हैं।
कल्कि की धोती का रंग लालिमा लेते हुए श्वेत रंग की है, जो "वाममार्ग + चन्द्र" शक्ति का प्रतीक है।
जिसे हम भीषण संहार करने वाला अवतार भी मान सकते हैं।
सनातन धर्म संस्कृति के संकेतों को कोई छुपा नहीं सकता।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री हरि विष्णु🙏🌷
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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