सनातन धर्म
कुछ ज्ञानचंद प्रायः सुनाते हुए देखा जा सकता है कि दूसरे पंथ/ मज हब का कुछ अपने में समाहित कर लेने पर सनातन संस्कृति का क्या बिगड़ सकता है!!
एक उदाहरण देता हूं...
एक लीटर शुद्ध गऊ माता का दुग्ध लें।
इसमें सभी औषधीय पुष्टिकारक गुण विद्यमान होंगे।
अब इसमें एक छटाक समुद्र का पानी मिलाएं।
कुछ परिवर्तन हो सकता है परंतु दुग्ध के गुण विद्यमान रहेंगे।
अब समुद्री जल मिलाते ही जाएं।
जब एक लाख लीटर समुद्री जल मिला देंगे तो इसमें दुग्ध का गुण समाप्त हो जाएगा और मात्र समुद्री जल का ही गुण रहेगा।
दुग्ध को सनातन धर्म और समुद्री जल को अन्य पंथों का समझें।
इसलिए मैं सनातन धर्म या संस्कृति और भाषा में किसी भी प्रकार के मिलावट का प्रबल विरोधी रहा हूं और विरोधी ही रहूंगा।
शुद्धता ही सनातन सत्य है।
जय सनातन धर्म 🙏🚩
ॐ नमो कालभैरवाय नमः 🙏🌺
जय महाकाल🙏🌺🚩
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