सनातन धर्म

जिस प्रकार का सनातनी जन जागरण आरम्भ हुआ है अब इसे एक धार्मिक नेतृत्व की परम आवश्यकता है।

क्योंकि धर्म पथ पर आगे बढ़ने के लिए सिकुलर राजनीतिक नेतृत्व प्रभावी नहीं हो सकता है।

हमारे मठ के मठाधीशों को तीन विषयों पर केंद्रित होना सनातन धर्म के भविष्य के लिए शुभ होगा।

क्योंकि सनातनी बचेंगे तभी तो ये भी रहेंगे।

१. इन्हें अस्पताल, अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि को छोड़ एक मात्र निःशुल्क शिक्षा पर केंद्रित होना चाहिए।

क्योंकि शिक्षा और अनुसंधान यह दो ही महत्वपूर्ण अवयव रहे हैं जिनके कारण आर्यावर्त विश्व का सिरमौर रहा था।

इस शिक्षा का उद्देश्य संस्कारित, विद्यावान, सबल, संग्रामी सनातनी निर्माण का होना चाहिए ना कि "मॉडर्न सिकुलर मनी मेकिंग मशीन" बनाने की।

२. धर्म ग्रँथों का निःशुल्क वितरण जनता के मध्य करना चाहिए। 

इसमें प्रारम्भ श्री हनुमानचालीसा और श्रीमद्भगवद्गीता से करें। 

एक बार जिन्हें धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने में रस मिलने लगता है फिर वे स्वतः अन्य धर्म ग्रँथों को स्वमेव रुचि से अध्ययन करेंगे।

यह उसी प्रकार है जैसे किसी बालक को एक बार मिठाई का स्वाद देना।

इन पर आरम्भ में अधिक धन व्यय की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

क्योंकि मैंने अपने खोजी भ्रमण में पाया है कि ८०% से अधिक हिनू ने तो कभी कोई धार्मिक पुस्तक पढ़ा ही नहीं है।

३. इसके अतिरिक्त गऊ माता की सेवा और सुरक्षा अनिवार्य है।

सिकुलर संविधान गऊ माता के रक्षा के लिए सक्षम नहीं हो सकता।

अतः गऊ माता का यह सम्पूर्ण भार मठों को अपने हाथों में ले लेना चाहिए।

मठों के पास धन का आभाव नहीं है। 

एक बार वे आगे आएँगे तो धर्मरक्षार्थ दान दाता भी हृदय से धन देंगे।

यदि वे इसके लिए आगे आते हैं तो एक बार जनचेतना जागृति की आवश्यकता है। 

यह जनचेतना स्वयं गति पकड़ लेगी।

स्वास्थ्य, अनाथालय, वृद्धाश्रम आदि की व्यवस्था सरकार का उत्तरदायित्व है।

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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