सनातन धर्म
ऐसा अद्भुत निर्माण क्या मात्र शिल्पकला में निपुणता प्राप्त कर ही किया जा सकता है.??
नहीं, कभी नहीं.!!!
ऐसा शिल्प निर्माण के लिए भगवान का अनुग्रह अनिवार्य है।
ऐसा प्रतीत होता है कि स्वयं देवशिल्पी विश्वकर्मा ने इसे हमारे सनातनी पूर्वजों के हाथों बनवाया है।
श्री सूर्य मन्दिर, मोढेरा, गुजरात।
(चित्र-साभार)
इस सूर्य मन्दिर के निर्माण का श्रेय सोलंकी साम्राज्य के सम्राट भीमदेव प्रथम को है।
भीमदेव प्रथम ने इस सूर्य मन्दिर का निर्माण १०२६ ई. में करवाया था।
सोलंकी सम्राट सूर्यवंशी गुजर माने जाते हैं।
श्री सूर्यदेव उनके इष्टदेव रहे हैं।
इस सूर्य मन्दिर का निर्माण इस उत्कृष्टता से किया गया था कि अयन काल में सूर्य का प्रथम किरण मन्दिर में स्थापित सूर्यदेव की प्रतिमा पर पड़ता था।
यही वह समय रहा है जब अत्याचारी, विधर्मी मुगल लूटेरा महमूद गजनी ने श्री सोमनाथ मन्दिर को अपवित्र और ध्वस्त किया था।
सोलंकी राजाओं ने अपने राजधानी पाटन के गौरव को अक्षुण्ण रख पाए थे।
समय के झंझावातों का प्रभाव मन्दिर पर भी पड़ा है किन्तु आज भी इसका उत्कृष्ट निर्माण दर्शनार्थियों को मन्त्रमुग्ध कर देता है।
उन सनातनी निर्माण कर्ताओं को नमन।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय सूर्यदिनायक🙏🌹
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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