सनातन धर्म

"सन्यास" कभी भी प्रयास से प्राप्त नहीं किया जा सकता है।

सन्यास तो स्वतः घटित होने की प्रक्रिया है।

जब भीतर की प्यास अपने परम् अवस्था में पहुंचता है तो संन्यास घटित होता है और जीव सन्यस्त हो जाता है।

एक संन्यासी संसार में तो होता है परंतु सन्यासी के भीतर संसार नहीं होता है।

वह संसार में रह कर भी संसार से निर्लिप्त होता है।

आजकल चर्चा है कि "संन्यासी उत्पादन" का factory 🏭 बैठाया जा रहा है।
जहां सन्यासी बनाया जाएगा।
एक किराना परचून व्यापारी जो सर्कस वाला करतब भी मंच पर दिखा कर धन लाभ करता है वही इस factory 🏭 का सर्वेसर्वा है।
वह कहता है कि महर्षि वंश परंपरा में सन्यासी का उत्पादन करेगा।
इस अंध मूढ़ मति से कुछ महर्षि के संदर्भ में पूछना चाहता हूं।

एक यक्ष प्रश्न है......
क्या कोई भी महर्षि कुंवारे रहे हैं.??
१. महर्षि कश्यप - दिती, अदिति, दनु, अरिष्ठा, सुरसा, खसा, सुरभि, विनता, कद्रु, क्रोधवशा, इरा, मुनि, ताम्रा (१३ पत्नियां),
२. अत्रि - अनुसूया,
३. वसिष्ठ - अरुंधति,
४. गौतम - अहिल्या,
५. जमदग्नि - रेणुका,
६. भारद्वाज - सुशीला,
७. विश्वमित्र - (मेनका, से संसर्ग)।

यहां तक कि प्रभु श्री राम गुरु वसिष्ठ, प्रभु श्री कृष्ण के गुरु संदीपनी सभी सनातनी गृहस्थ आश्रम से ही रहे हैं।

मनु से दाधिच से पराशर तक सभी गृहस्थ आश्रम से ही हैं।

कलयुग में जिन्हें महर्षि का सम्मान प्राप्त है वे श्यामा चरण लाहिरी महाशय भी गृहस्थ जीवन से ही रहे हैं।

देवर्षि नारद जी अपवाद स्वरूप ब्रह्मचर्य आश्रम में हैं।

सनातन धर्म में सभी देव देवी गृहस्थ आश्रम से ही रहे हैं।

और तो और इस "लाला व्यापारदेव" की उत्पत्ति भी गृहस्थ जीवन में रहने वाले माता पिता से ही हुआ है।

तो फिर इसे गृहस्थ जीवन से इतनी घृणा क्यों.???

एक बात और... कुंवारा होना और ब्रह्मचारी होना दोनों ही में धरती और आकाश का अंतर होता है।

वास्तविकता यह है कि इसके factory 🏭 में सन्यासी नहीं अपितु यांत्रिक बंदर तैयार होगा जो अपने मदारी के निर्देश पर नाचेगा जिससे यह धन वृद्धि करने में सहायक होगा।

क्या यह स्वयं सन्यासी है.???
क्या यह संसार से निर्लिप्त है.???
तो इसके factory 🏭 में बनाया गया दोपाया कैसे सन्यासी होगा.???
जो स्वयं "सिकुलरिजम वायरस" से संक्रमित हो वह सनातन धर्म का भला कैसे करेगा.???

और सबसे दूर्भाग्यपूर्ण है कि जिस माता-पिता के आज्ञा पालन की सनातन संस्कृति में परंपरा रही है उन माता-पिता के आज्ञा की अवहेलना करने का बीजारोपण इस factory 🏭 के आरम्भ में ही किया गया है।

यह यांत्रिक बंदर सनातन संस्कृति के लिए भविष्य में घातक ही होगा।
देवाधिदेव महादेव ही विचार करें क्योंकि... सब उनके ही हाथ है।
जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

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