सनातन धर्म
शूकर (BOAR/वाराह) व सूअर (PIG/HOG/SWINE) दोनों में स्पष्ट रूप से भिन्नता दिखाई देता है।
अतः सनातनी को शूकर को सूअर समझने की भूल से बचना चाहिए।
शूकर के अग्र-दन्त (कैनाइन टीथ) बाहर निकले होते हैं।
शूकर को वाराह कहा जाता है।
शूकर मुख्यतः शाकाहारी भोजन करते हैं जैसे पौधों की पत्तियाँ, बीज, पुष्प गुच्छ आदि।
शूकर छतवा (मशरूम) को भी चाव से खाते हैं।
वहीं सूअर विष्टा भक्षी और विष्टा में ही लौटने वाला होता है।
वराह पवित्र और सूअर निकृष्ट होता है।
सम्पूर्ण भारतवर्ष में भगवान श्रीमन्नारायण के विशुद्ध वाराह रूप में एक विशिष्ट मन्दिर खजुराहो, मध्यप्रदेश में हैं।
इस वाराह मन्दिर में भगवान विष्णु के वाराह अवतार का अद्वितीय अखण्ड पाषाण प्रतिमा स्थापित है। (चित्र - साभार)
असुर हिरण्याक्ष जब पृथ्वी को लेकर रसातल में चला गया था तो सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वाराह अवतार धारण किए। श्री विष्णु के यह अवतार सतयुग के तृतीय चरण में हुए।
भगवान वाराह से हिरण्याक्ष का युद्ध सहस्र वर्षों तक चला। अंततोगत्वा भगवान वाराह के द्वारा हिरण्याक्ष का वध हुआ।
भगवान वाराह अपने अग्र-दन्त के मध्य पृथ्वी को धारण कर रसातल से लाकर ब्रह्माण्ड में अपने स्व-स्थान पर स्थापित किए।
भगवान वाराह संग भूदेवी का विवाह भी हुआ।
वाराह पुराण में यह समस्त कथा एक पाठ के रूप में अंकित है।
वाराह मन्दिर में भगवान वाराह की सम्पूर्ण प्रतिमा दुर्लभ कलाकृतियों से अलंकृत है।
इस अद्भुत मन्दिर को वर्ष १९८६ में विश्व धरोहर का स्थान प्राप्त हुआ।
लौटें सनातन धर्म की ओर और धर्मनिष्ठ बनें.!!
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री हरि विष्णु🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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