सनातन धर्म

सृजनात्मकता का उच्चतम स्तर क्या हो सकता है यह जानना है तो सनातन संस्कृति के शिल्पकला को देखें.!!

किसी भी शिल्प को मूर्तरूप देने से पूर्व उसका एक कल्पित चित्र मस्तिष्क में बनाना ही होता है।

इस शिल्प को देखें...!!

यह सनातनी शिल्पकार पूर्वजों के हाथों निर्मित एक अद्वितीय रचना है।

जिसे आज कागज पर उकेरना भी असम्भव ही प्रतीत होता है उसे हमारे सनातनी पूर्वजों ने पाषाण, धातु, हाथीदाँत पर गढ़ कर विश्व को सौंप दिए हैं, वह भी सहस्रों वर्ष पूर्व ही।

श्री रंगनाथस्वामी मन्दिर, श्रीरंगम के गोपुरम का यह लघु रूप हाथीदाँत पर निर्मित किया गया है।
(चित्र-साभार)

यह शिल्प वर्तमान में सैनफ्रांसिस्को के ऐशियाई संग्रहालय के कला संकाय में सुरक्षित है।

ध्यान से इस शिल्प को देखें, कितनी निपुणता से प्रभु शेषशायी, शेषनाग, देवी देवताओं, गणों, ऋषियों, तोरणों, आभूषणों, अलंकरणों, मन्दिर इत्यादि को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।

क्या किसी किताबी पंथ में ऐसा अद्भुत सृजन देखने को प्राप्त होता है.?? नहीं, कहीं नहीं.!!

पुनः लौटें सनातन संस्कृति परम्परा की ओर.!!

कथित आधुनिकता ने केवल आपसे छीना ही है, दिया कुछ नहीं.!!

अकल्पनीय विश्व सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय श्रीमन्नारायण🙏🌺

जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

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