सनातन धर्म
चित्र - १ और
चित्र - २ को
Zoom करके ध्यान से देखें.....!!!
चित्र - २ को विश्व का बच्चा - बच्चा जानता है।
जितनी चर्चा विश्व में इस चित्र की होती है किसी दूसरे की नहीं होती है।
अब चित्र - १ की बात करें तो विश्व समुदाय की तो बात ही छोड़िए यहां इस देश के आधिकांश जनसामान्य भी इस चित्र से अनभिज्ञ हैं।
जबकि इस चित्र को यदि तुला के एक पलड़े पर रखें और विश्व के सभी चर्चित वस्तुओं को दूसरे पलड़े पर तो इस चित्र का पलड़ा ही झुका मिलेगा।
ऐसा क्यों हुआ है.???
इसका सबसे बड़ा कारण हमारे सनातनी पूर्वजों के बनाए धरोहरों से हमारा मुंह मोड़ लेना और एक तिरस्कार वाली मानसिकता ही है।
हम अपने अद्वितीय सनातन धरोहर को न तो संरक्षित कर पाए और ना ही इसे विश्व में प्रदर्शित कर पाए।
दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना है ना.....
क्या अपने धर्म संस्कृति परंपरा के प्रति हमारा कोई उत्तरदायित्व नहीं है.???
क्या इन धरोहरों के वैभवशाली इतिहास को जनसामान्य पहुंचाना हमारा कर्तव्य नहीं होता है.???
आइए मिलकर एक प्रयास तो करें.....!!!
जिन्होंने भारतवर्ष के सनातन संस्कृति के अद्भुत मन्दिरों का भ्रमण कर दर्शन ही नहीं किया उनके लिए भारतीय वास्तुकला ताजमहल से प्रारम्भ हो कुतुबमीनार पर समाप्त हो जाता है।
ये चित्र चेन्नाकेशवा मन्दिर, कर्नाटक के हैं।
इस में नर्तकियों की जीवंत मूर्तियों की भाव भंगिमाओं को देख मुग्ध हो जायेंगे।
ये हैं सनातन पूर्वजों द्वारा निर्मित अकल्पनीय शिल्प।
शिल्पकार के निपुणता और परिश्रम के बारे में सोचकर ही अचंभित हो जायेंगे।
क्या यह निर्माण केवल छेनी हथौड़ी से सम्भव है???
विधर्मी आक्रांताओं ने इस रहस्यमयी सनातन कला को मृत कर दिया।
इस मूर्तियों से आप मोनालिसा की तुलना करें और निर्णय ले कि कौन सी कलाकृति अतुलनीय है।
वमियों कांगियों ने वैभवशाली सनातन धरोहरों की सत्यता छुपाने के निकृष्ट पाप किया है।
अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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