सनातन धर्म
सनातनी पूर्वजों के लिए धर्म का स्थान सर्वोपरि रहा था।
अपने आराध्य देव के प्रति आस्था और समर्पण उच्चतम स्तर पर होने से ऐसा अकल्पनीय शिल्प का निर्माण सम्भव हो पाया।
ये मूर्ति श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर में स्थित हैं।
Zoom करके देखने पर इसमें कोई भी १" ईंच का भाग भी बिना नक्काशी के नहीं है।
ध्यान रहे... यह सम्पूर्ण निर्माण बिना किसी विद्युत चालित यंत्रों के स्वहाथों से ही किया गया है।
उस लुप्त पाषाण वास्तुशिल्प विधा के बारे में सोचकर ही मन पुलकित हो जता है, रोमांच से भर जाता है।
किन्तु दुर्भाग्य से विधर्मियों ने उन दिव्य ज्ञान से परिपूर्ण पुस्तकालयों नालंदा विश्वविद्यालय को जला कर समाप्त कर दिया।
उस ज्ञान की विलुप्ति मात्र सनातनियों का ही नहीं अपितु समस्त मानव समुदाय का अपूर्णीय क्षति है।
इसे देखकर शिल्पकार के परिश्रम और समर्पण के प्रति आदर से मस्तक झुक जाता है।
महान सनातनी पूर्वजों का अद्वितीय निर्माण...!!
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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