सनातन धर्म

वैष्णव मन्दिरों में मन्दिर के मुख्य द्वार पर दोनों ओर द्वारपाल बने हुए होते हैं। 

संलग्न चित्र में द्वारपाल श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, बेलूर और श्री होयसलेश्वर मन्दिर, हलेबीदु, कर्नाटक के हैं।(सभी चित्र-साभार)

इन मूर्तियों के निर्माण की जटिलता को ध्यान से देखें.!!!

शिल्पकारों ने अपने सम्पूर्ण कला को इन पाषाण खण्डों में उड़ेल कर विश्व के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

परन्तु, इस देश में सदियों तक उन अनाम सनातनी शिल्पकारों को सराहना और सम्मान से वामजीवियों के द्वारा वंचित रखा गया।

सनातन धर्म के इन द्वारपालों के सम्बंध में अद्भुत पौराणिक कथा है।

ये द्वारपाल जय और विजय श्री नारायण भगवान के निवास स्थान बैकुण्ठ के मुख्य द्वार पर रहते हैं। ये श्री विष्णु के अनन्य भक्त हैं।

बैकुण्ठ शास्वत आनन्द का सर्वोच्च स्थान है।

एक बार श्री ब्रह्मदेव के पुत्र सनकादिक ऋषि भगवान विष्णु से मिलने बैकुण्ठ गए।

जय और विजय ने उन्हें बैकुण्ठ में प्रवेश नहीं दिया और ऋषि का उपहास करते हुए अपमानित कर दिया।

ऋषि ने कुपित होकर जय विजय को पत्थर हो जाने का श्राप दे दिया।

श्री लक्ष्मी जी और श्रीमन्नारायण के आग्रह पर ऋषि ने उनके शाप मुक्ति का उपाय बताया कि तीन जन्मों तक श्रीमन्नारायण के द्वारा वध होने के उपरांत ही उन्हें शाप से मुक्ति मिल सकता है।

ये जय विजय ही सतयुग में हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप, त्रेतायुग में दशनन और कुम्भकर्ण तथा द्वापरयुग में शिशुपाल और दन्तवक्र के रूप में हरि-द्रोही होकर जन्म लिए।

श्री हरि विष्णु जी अपने भक्त के उद्धार के लिए सतयुग में श्री वाराह और श्री नरसिंह, त्रेतायुग में श्री राम तथा द्वापरयुग में श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिए और इनका वध कर मुक्ति प्रदान किए।

आज भी सभी श्री विष्णु और श्री लक्ष्मी मन्दिर के द्वार पर जय विजय द्वारपाल होते हैं।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय श्रीमन्नारायण🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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