सनातन धर्म
जिन्होंने विश्व के धरोहरों को सूची में केवल सात आश्चर्य (अजूबों/WONDERS) बनाया है उन्होंने सम्पूर्ण भारतवर्ष के भवनों का भ्रमण ही नहीं किया है अन्यथा यह मूढ़तापूर्ण निर्णय नहीं किया होता।
ये हैं भारतवर्ष के विभिन्न राज-प्रासादों के झरोखे जिनके अतुलनीय सूक्ष्म कलाकृतियों को देख कर ही अचंभित हो जायेंगे।
जब झरोखे की शिल्पकला इतनी उत्कृष्ट है तो सम्पूर्ण राजप्रासाद और भवनों के सौन्दर्य की कल्पना स्वयं कर सकते हैं।
और हाँ.!! यह कृति बिना किसी कंप्यूटर ग्राफिक्स या लेज़र गाइडेड टेक्नोलॉजी के मध्यकालीन राजप्रासादों में शिल्पकारों ने अपने हाथों से निर्मित किया गया है।
पंरतु हाय रे सनातन संस्कृति का दुर्भाग्य.....!!
यह विडम्बना ही है कि इसी भूमि में जन्मे मैकाले व मैक्समूलर के वामपंथी मानसपुत्र इतिहासकार ने आर्यावर्त के वैभवशाली इतिहास को ताजमहल से आरंभ कर कुतुबमीनार पर समाप्त कर दिया।
धन्य है सनातनी पूर्वज जिन्होंने इसे निर्मित किया है।
अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
Comments
Post a Comment