सनातन धर्म
यह नटराज की प्रतिमा अपने आप में कुछ विशिष्टता समेटे हुए हैं(चित्र -१)।
नटराज की यह दुर्लभतम प्रतिमा कश्मीर संग्रहालय, कश्मीर में संरक्षित है।
(चित्र-साभार)
सामान्यतया प्रचलित नटराज की प्रतिमा(चित्र - २) अधिकांशतः देखने को मिलते हैं।
इस प्रतिमा (जिन्हें "अंजली मुद्रा" कहा जाता है) में भगवान शिव के बाएँ हाथ में अग्नि जो संहारक शक्ति है।
और सृष्टि के संहार और आवधिक विखंडन के पश्चात श्री ब्रह्मदेव को नई सृष्टि रचना के लिए आमंत्रण के संकेत हैं।
दाएँ हाथ में डमरू जो अनाहत नाद व सृष्टि के स्पंदन के प्रतीक हैं।
इनके पाँव के नीचे दानव 'अपस्मार' दबा हुआ है। जिसके सभी दानवी शक्तियों के दलन उपरांत भगवान शिव स्वयं संतुलित हैं।
एक पाँव उठा हुआ है तो प्रकृति के सतत अग्रसर रहने की प्रवृत्ति को इंगित करते हैं।
परन्तु इस चित्र - १ में भगवान शिव के दोनों पाँव ऊर्ध्व दिशा में हैं।
इनके बाएँ हाथ के नीचे दानव 'अपस्मार' दबा हुआ है।
अद्भुत, अनुपम, अनूठा प्रतिमा...!!!
अप्रतिम सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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