सनातन धर्म
आर्यावर्त के इन्द्रप्रस्थ का "विष्णु-स्तम्भ" तो सदैव से ही चर्चा में रहा है।
म्लेच्छों के अवैध अतिक्रमण के पश्चात इसे दिल्ली का कुतुबमीनार कहा जाने लगा।
विचार करने की बात है कि जब गुलाम वंशीय कुतुबुद्दीन मात्र चार वर्ष ही राज कर पाया तो उसने इस अद्भुत कृति का कैसे निर्माण करवा दिया.??
अवश्य सोचना.....!
परन्तु यहाँ एक अन्य "विष्णु-स्तम्भ" की बात करते हैं....
इस विष्णु-स्तम्भ को "कीर्ति-स्तम्भ" के नाम से भी ख्याति प्राप्त है।
राजपुताना शासकों में राणा कुम्भ सबसे पराक्रमी और शौर्यशाली राणा रहे हैं।
राणा कुम्भा ने महमूद खिलजी को धरती पर नाक रगड़वा कर १४४८ में पराजित कर दिए थे।
महमूद खिलजी पर अपने विजय को राणा कुम्भा ने भगवान श्री नारायण हरि विष्णु को समर्पित कर इस विजय के स्मृति में दिव्य "कीर्ति-स्तम्भ" का निर्माण करवाये थे।
यह कीर्ति-स्तम्भ (विष्णु-स्तम्भ) चितौड़गढ़, राजस्थान में स्थित है।
इस कीर्ति-स्तम्भ के ९ तल हैं। इसकी ऊँचाई १२२' फीट और चौड़ाई ३३' फीट है।
इस विष्णु-स्तम्भ में सौन्दर्यपूर्ण और कलात्मक रूप से सनातनी देव/देवियों की मूर्तियों को गढ़ा गया है।
इसी कारण इस कीर्ति-स्तम्भ को सनातनी देव/देवीयों का संग्रहालय भी कहा जाता है।
यह कीर्ति-स्तम्भ आज भी लुटेरे, विधर्मी, मलेच्छों पर सनातनी अजेय वीर योद्धा के विजय पताका को विश्व के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत करते हैं।
शौर्यशाली सनातन धरोहर...!!
सभी सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने हेतु केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ.!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्रीमन्नारायण🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
Comments
Post a Comment