सनातन धर्म

अद्वितीय, अकल्पनीय, अद्भुत शिल्प जिसे हमारे सनातनी पूर्वजों ने अपने हाथों से निर्मित किया है।

जैसा कि वामपंथी इतिहासकार ने ताजमहल, क़ुतुबमीनार को मुगलों का बनाया हुआ बताता रहा है,
क्या  ऐसा एक भी उदाहरण इस प्रतिमा के जैसा समकालीन मुगलों के देशों में बना हुआ दिखा सकता है??

इस दिव्य शिल्पकला को वामपंथियों, गुलाबों के वंशजों ने इतिहास से ही मिटा दिया है।

यह मुग्ध करने वाली वाद्ययंत्र सह देवी की मूर्ति श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, बेलूर, कर्नाटक में है। (चित्र - साभार)

इसके जैसा आभूषणों, नैन - मुखाकृति, और भाव-भंगिमाओं का जीवंत प्रदर्शन अन्य किसी मूर्ति में दृष्टिगोचर नहीं होता।

इसके नयनों, भाल, चिबुक, बिरौनियों, ओष्ठों, नासिका के गढ़न, स्कंधों के ढलान, कमर की कमनीयता, उंगलियों के घुमाव को ध्यान से देखें तो आप शिल्पकार के कला निपुणता और दक्षता से चमत्कृत हो जाएंगे।

इस वाद्ययंत्र के तार तक को पाषाण से ही निर्मित किया गया था, जो अब खंडित हो गया है।

और यह ध्यान रखें कि कि यह संपूर्ण निर्माण जोड़ रहित अखण्ड पाषाण शिला से ही किया गया है तो कितनी सावधानी बरतनी पड़ती होगी.??

कितनी कुशलता पूर्वक एक एक यंत्र पर संतुलित आघात देना होता होगा कि निर्माण में अनावश्यक क्षति नहीं पहुंचे.??

इसके सूक्ष्म गहने, आभूषणों, केश विन्यास, वस्त्र, कुंडल आदि के निर्माण प्रक्रिया के बारे में स्थित चित्त होकर सोचेंगे तो रोमांस से भर उठेंगे.!!

भले ही आज यह खंडित हो पर क्या आप को ढूंढने पर भी कोई त्रुटि इस मूर्ति में दिखाई देती हैं.??

नहीं ना.!!

इसे ही सर्वगुण सम्पन्न निर्माण कहा जाता है.!!

नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने इसे निर्मित किए हैं.!!

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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