सनातन धर्म

किसी की आँखों को अपने हथेलियों से ढाँप लेना आज भी एक सामान्य क्रीड़ा है।

ऐसी कथा है कि........

एक बार जगतमाता पार्वती ने परिहास में ही परमपिता देवाधिदेव भगवान महादेव के आँखों को अपने हथेलियों से ढाँप लिए।

भगवान महादेव के आँखों के बन्द होते ही सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में अन्धकार व्याप्त हो गया।

सृष्टि विनष्ट होने लगी।

सम्पूर्ण ब्रह्मांड में सभी चराचर जगत में कोलाहल सुनाई देने लगा।

सारी सृष्टि में हाहाकार मच गया।

तब सृष्टि की रक्षा हेतु सभी देवताओं ने मिलकर देवाधिदेव महादेव की स्तुति वाचन किया.!!  प्रार्थना किए.!!

प्रभु कृपानिधान उनके स्तुति से प्रसन्न हो अपने नेत्रों को खोल सृष्टि की रक्षा किए।

इस कथा को सनातनी शिल्पकारों ने अत्यंत सौन्दर्यपूर्ण रूप में पत्थरों में गढ़ा है।

एकाम्बरेश्वरर मन्दिर, काँचीपुरम, तमिलनाडु।
(चित्र - साभार)

इस मूर्ति में भगवान महादेव के आँखों पर देवी माँ पार्वती अपनी हथेली ढांप रखी हुई है।

नन्दी महाराज जी और वासुकी नागनाथ की जीवंत मूर्ति निर्मित है।

सभी देव ऋषि प्रार्थना की मुद्रा में हैं।

मुकुट, आभूषणों, वस्त्रों, अंग - विन्यासों, पुष्प - पत्तियों के निर्माण प्रक्रिया में सभी सुक्ष्म से सुक्ष्म कलाकृतियों में अनुपम रूप में गढ़ा गया है।

वैभवशाली सनातन धरोहर....!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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