सनातन धर्म

जीवन के दैनिक व्यस्तता और आपाधापी में में कभी कुछ समय मिले तो इन चित्रों को ज़ूम करके ध्यानपूर्वक देखें.!

ये सभी सूक्ष्म कलाकृतियाँ और जाली काष्ठ पर नहीं अपितु पत्थरों पर निर्मित किए गए हैं।

एक बार विचार करें कि यदि कहीं हथौड़ी का आघात कुछ अधिक हो जाता तो क्या सम्पूर्ण अंश ही नहीं नष्ट हो जाता.?

कितनी एकाग्रता और निपुणता की आवश्यकता होती होगी इस अद्भुत सृजन में यह सोचकर ही रोमांच होता है.!

ऐसा प्रतीत होता है कि जिन्होंने विश्व के धरोहरों को सूची में केवल सात आश्चर्य (अजूबों/WONDERS) बनाया है उन्होंने सम्पूर्ण भारतवर्ष के भवनों का भ्रमण ही नहीं किया है अन्यथा यह मूढ़तापूर्ण निर्णय नहीं किया होता।

ये हैं भारतवर्ष के विभिन्न राज-प्रासादों के झरोखे जिनके अतुलनीय सूक्ष्म कलाकृतियों को देख कर ही अचंभित हो जायेंगे। (सभी चित्र - साभार)

और हाँ.!! यह कृति बिना किसी कंप्यूटर ग्राफिक्स या लेज़र गाइडेड टेक्नोलॉजी के मध्यकालीन राजप्रासादों में शिल्पकारों ने अपने हाथों से निर्मित किया गया है।

समकालीन रेगिस्तानी झुंडों द्वारा निर्मित कोई भी, वामी/कामी/लिब्रांड इस स्तर का वास्तु और स्थापत्य कला का एक भी उदाहरण प्रस्तुत कर सकता है क्या.??

लेकिन सनातन संस्कृति का दुर्भाग्य और विडम्बना ही है कि मैकाले व मैक्समूलर के वामपंथी मानसपुत्र इतिहासकार ने ताजमहल से आरम्भ कर कुतुबमीनार पर इतिहास समाप्त कर दिया।

धन्य है सनातनी पूर्वज जिन्होंने इसे निर्मित किया है।

अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩🙏

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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