सनातन धर्म

जहाँ से शैव परम्परा का आरम्भ हुआ, जहाँ महर्षि कश्यप और आदिशंकराचार्य ने तपश्चर्या किए उसी कश्मीर में आज यह शिव मन्दिर उपेक्षित हैं क्योंकि इनके देख-रेख के लिए अब कोई सनातनी जीवित हैं ही नहीं।

ये हैं श्री शिव मन्दिर ल्वदुव गाँव, पाम्पोर प्रखंड, पुलवामा जनपद, कश्मीर में..!!!

इस मन्दिर को जीवनाथ मन्दिर के नाम से जाना जाता है जो भगवान शिव को समर्पित है।

ल्वदुव गाँव के सभी सनातनी या तो धर्म परिवर्तन को प्राप्त हुए या मृत्यु को।

यह शिव मन्दिर आठवीं शताब्दी का माना जाता है जो एक झरने के मध्य एक प्राकृतिक तलैया में स्थापित है तथा इसे "सन्यासर नाग" के नाम से जाना जाता है।

कदाचित अब यह मन्दिर अधिकांश कश्मीरी लोगों को भी ज्ञात नहीं है। (चित्र - साभार)

वर्ष के अधिकांश समय में यह जल में रहता है। मन्दिर के भग्नावशेषों में कुछ टूटे -फूटे भीत बचे हुए हैं और कभी सूखे ऋतु में भगवान शिव की प्रतिमा भी दृष्टिगत होते हैं।

श्री जीवनाथ शिव मन्दिर विधर्मियों और रेगिस्तानी पशुओं के अत्याचार की दुःखद लोमहर्षक गाथा आज भी सुना रहे हैं।

आज भी यह यक्ष प्रश्न है कि क्या इस मन्दिर में कभी पञ्चाक्षरी मंत्र गूंजेगा.?? क्या कभी पुनः रुद्राभिषेक होगा.??

एक विस्मृत सनातन धरोहर....!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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