सनातन धर्म
एक अतुलनीय मन्दिर जिसके निर्माण का श्रेय पूर्व गङ्ग साम्राज्य के नरेश नरसिंहदेव प्रथम को जाता है।
इन्होंने १३ वीं शताब्दी (१२६० ई.) में कोणार्क के भव्य सूर्य मन्दिर का निर्माण करवाया।
यह सूर्य मन्दिर पुरी से लगभग २२ मील उत्तरपूर्व में समुद्र तट पर स्थापित है।
कोणार्क सूर्य मन्दिर, कोणार्क, पुरी जनपद, ओडिशा।
यह मन्दिर मुख्यतः तीन भागों में बना है, १. प्रवेश द्वार, २. नृत्य मण्डप, ३. मुख्य मन्दिर (गर्भगृह)।
यह मन्दिर सूर्य के रथ की आकृति में निर्मित है जिसे सात अश्व खींचते प्रतीत होते हैं (समुद्र की ओर चार अश्व व दूसरी ओर तीन अश्व)।
इस रथ के पहिये पर सौर-घड़ी निर्मित है।
मुख्य मन्दिर के बाहरी दीवारों पर संभोग मुद्राओं में लघु भित्ति चित्रों की सम्पूर्ण सृंखला उकीर्ण है।
वामपंथियों व अ-सनातनी लोगों को इसपर आपत्ति हो सकता है।
वास्तव में यह मन्दिर ध्यान साधना के उच्चतम स्थल रहे हैं।
ये मूर्तियाँ कहती हैं कि....
यदि आपमें इस चित्रों को देखकर लेशमात्र भी वासना का विचार उत्पन्न होता है तो अभी साधना के लिए आपकी तैयारी पूर्ण नहीं हुई है।
अभी और तैयारी करें।
अभी आपके लिए उपयुक्त समय नहीं आया है।
किन्तु, यदि इन चित्रों को देखकर भी आप निर्लिप्त हैं तो आपका मन्दिर में साधना के लिए स्वागत है।
आप अपने आराध्य देव से एकाकार हो सकते हैं।
मुख्य मन्दिर के गर्भगृह में भगवान सूर्यदेव का प्रतिमा आधार रहित था, अर्थात वायु में लटकता हुआ था।
दुर्भाग्यवश इस मन्दिर को "सफेदा गैंग" ने ध्वस्त कर दिया था।
अब तो केवल भग्नावशेष ही है।
वैभवशाली भव्य सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय आदित्य सूर्यदेव 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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