सनातन धर्म

समस्त स्वर परमपिता परमेश्वर शिव से ही उत्पन्न हैं।
स्वर ही ईश्वर हैं।
और स्वर नाद के ही पर्याय हैं।
नाद देवाधिदेव महादेव के डमरू से उत्पन्न हैं।
प्रकृति के सभी स्पंदन भगवान शिव के नृत्य से ही संचालित/नियंत्रित हैं।

भगवान शिव का एक अद्भुत, अद्वितीय नृत्य प्रतिमा...!!!

यह शिव प्रतिमा बादामी गुफा (cave - 1) कर्नाटक के प्रवेश द्वार पर ही निर्मित हैं। (चित्र - साभार)

यह भगवान शिव का अतिभङ्ग मुद्रा अष्टादश भुजी हैं।

भगवान शिव के सभी अष्टादश भुजाएँ अस्त्र, शस्त्र, वाद्य यंत्रों से सुसज्जित हैं।

भगवान शिव के हाथों में त्रिशूल, पाश, डमरू, मृदंगम, नाग इत्यादि शोभायमान हैं।

भगवान शिव अपने अनुपम नृत्य मुद्रा में दिव्य अलौकिक ऊर्जा बिखेर रहे हैं जिनसे ये सम्पूर्ण जगत चलायमान है।

यहाँ भगवान शिव का मुखमंडल परम् शान्ति लिए हुए हैं।

नन्दी महाराज और श्री गणपति भईया इस दुर्लभ दृश्य के आनन्द का रसपान कर रहे हैं।

शिव गण वाद्य यंत्रों पर थाप दे रहे हैं।

एक अद्वितीय "आदियोगी" के रूप में परमपिता देवाधिदेव महादेव का यह रूप भक्तों को आकर्षित कर रहे हैं।

दुर्लभतम सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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