सनातन धर्म

उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण भारत में आततायी मुगलों का वर्चस्व कम रहा इसलिए उत्तर भारत में जहाँ अधिकांश मन्दिर मुगलों द्वारा जीर्ण शीर्ण व ध्वस्त कर दिया गया किन्तु दक्षिण भारत के मन्दिर तुलनात्मक रूप से सुरक्षित हैं।

ऐसा ही एक मन्दिर श्रीकांतेश्वर मन्दिर, नांजनगुड मैसूर, कर्नाटक हैं।

श्रीकांतेश्वर मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित हैं।

इस मन्दिर को वामपंथियों और कथित लिबरल इतिहासकारों को देखना चाहिए जिससे उनके ज्ञानचक्षु पर पड़े सनातन द्रोह का आवरण हटे और वे नीच भी देख सकें कि मुगलों और अंग्रेजों के भारत लूटने के पूर्व भी भारत में अकल्पनीय और अविश्वसनीय मन्दिरों, भवनों, राज-प्रासादों का निर्माण होता था। (Zoom करके देखें)

नांजनगुड तीर्थ क्षेत्र अति प्राचीन है।

यह कावेरी नदी के एक सहायक नदी काबिनी के तट पर स्थित है।

नांजनगुड दसवीं/ ग्यारहवीं शताब्दी में गंग और चोल साम्राज्यों के समय से ही प्रसिद्ध रहा है।

देवाधिदेव महादेव को यहाँ श्रीकांतेश्वर के नाम से पूजे जाते हैं।

द्रविड़ शैली में बना श्रीकांतेश्वर मन्दिर १४७ स्तम्भों पर बना हुआ है।

मन्दिर के बाहर भगवान शिव का एक विशाल प्रतिमा है।

ऐसी मान्यता है कि इस मन्दिर में स्थपित शिवलिङ्गम की स्थापना गौतम ऋषि ने की थी।

इस मन्दिर परिसर से कुल १०८ शिवलिङ्गम हैं।

गेहूंएं रंग के पत्थर से बने इस मन्दिर के गोपुरम और चारदीवारी  के उपर श्री गणपति भईया के भिन्न भिन्न मुद्राओं में युद्ध वाली छवि निर्मित है।

इस मन्दिर में भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणपति भईया के लिए पृथक पृथक गर्भगृह हैं।

इस मन्दिर के विशाल मुख्यद्वार को महाद्वार कहा जाता है।

सात तल वाले इस महाद्वार में सोने के सात कलश मढवाए हुए हैं।

इस कलश की ऊँचाई लगभग तीन मीटर है।

इस मन्दिर में एक स्थान ऐसा भी है जहां ऊँचे छत से प्रातः काल सूर्यदेव की पहली किरण पहुंचती है।

इस मन्दिर में वर्ष में दो बार रथोत्सव का आयोजन किया जाता है।

इस रथयात्रा में रथों पर भगवान श्रीकांतेश्वर, माँ पार्वती, श्री गणपति भईया, श्री मुरुगन भईया पृथक पृथक विराजमान रहते हैं।

पूजा अर्चना के उपरांत रथयात्रा निकाली जाती है।

इस महोत्सव के दर्शन को लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है।

इतनी विलक्षणताओं के पश्चात भी पाठ्य पुस्तकों में इसे स्थान नहीं मिला है।

ये वैदिक सनातन संस्कृति का असम्भव कलाकृति की श्रेणी का मन्दिर निर्माण है।

इसकी जटिल कलाकृतियों को सनातनी पूर्वजों ने बिना किसी आधुनिक यन्त्रो और तकनीकों के किस प्रकार निर्माण किए होंगे.?? यह कल्पना से भी परे है। परम् आश्चर्यजनक.!!!

वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम