सनातन धर्म

देवाधिदेव भगवान शिव सर्वव्यापी हैं।
जिनके भक्तों द्वारा निर्मित शिवालय सनातन धर्म के अमिट छाप व गौरवपूर्ण अतीत के हस्ताक्षर हैं।
क्रूर काल के झंझावातों में भी इनके धर्मध्वज लहराते हुए समस्त संसार में देखा जा सकता है।

मणिकगढ़ किला के चहारदीवारी और मन्दिर के अवशेष जो घेरकिला, मणिकगढ़, महाराष्ट्र में है, यह भी उन्हीं जीवंत प्रमाणों में एक है। (चित्र - साभार)

मणिकगढ़ किला को प्राचीन काल में व्यावसायिक मार्ग पर दृष्टि रखने के लिए बनाया गया था जो मावल (पुणे) से तटीय बन्दरगाह तक जाता था।

मणिकगढ़ अब पैदल अवरोहण का पर्यटन स्थल है।

अब वर्तनान समय में किला के केवल भग्नावशेष ही बचे हैं।

यहीं एक विशाल पत्थर को काटकर बनाए गए कुण्ड में यह अनुपम शिवलिङ्गम स्थापित हैं।

शिवलिङ्गम के निकट ही नन्दी महाराज अपने चिरप्रतिक्षा की मुद्रा में बैठे अपने प्रभु को निहार रहे हैं।

शिवलिङ्गम की संरचना अनोखी और निराली है।

जिस पाषण कुण्ड में शिवलिङ्गम स्थापित हैं उसे "दरया टेक" कहा जाता है।

इस अनुपम शिवलिङ्गम, नन्दी महाराज और कुछ पत्थरों के यत्र तत्र बिखरे चट्टानों के अतिरिक्त अब कुछ भी शेष नहीं बचा है।

शिव भक्त अपने आराध्य देव के लिए आज भी यहाँ आते हैं।

गौरवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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