सनातन धर्म
किसी भी वास्तुशिल्प के निर्माण का प्रथम चरण उसकी परिकल्पना ही होती है।
आधुनिक आर्किटेक्ट उसे ही आधुनिक तकनीक का उपयोग कर ग्राफिक्स का रूप देते हैं।
जिसे मूर्तिकार/कलाकार/श्रमिक अपने हाथों/यंत्रों/प्रयासों से मूर्त रूप प्रदान करते हैं।
संलग्न छवियों को ज़ूम करके देखें.!!
(चित्र - साभार)
अब विचार करें कि जिन सनातनी वास्तुकारों ने इसकी परिकल्पना की होगी उनकी कल्पनाशीलता किस उच्चतम स्तर की होगी.!!
इस परिकल्पना को साकार करने हेतु जो आवश्यक गणना/माप/साधन उपलब्ध करवाने का जो कार्य होगा वह कितना दुरूह होगा.!!
परन्तु बिना किसी आधुनिक तकनीक और आधुनिक यंत्रों के हमारे सनातनी पूर्वजों ने यह कार्य सफलतापूर्वक संपन्न किया और इसे छोड़ गए विश्व समक्ष अपने उत्कृष्ट कल्पनाशीलता और कार्य सम्पादन के प्रमाण के रूप में.!!
कोई माने या नहीं माने किन्तु उन्होंने जो भी निर्माण किया वह अतुलनीय है, अद्वितीय है।
धन्य है वे सनातनी शिल्पकार जिनकी रचना सहस्रों वर्षों के पश्चात आज भी गर्व से खड़ा है।
यह कला आज इसलिए विलुप्त हो गया है क्योंकि हमारे गुरुकुल परम्परा को ध्वस्त समाप्त कर दिया गया।
मन्दिर एंडोमेंट एक्ट को निरस्त कर अपने सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने हेतु केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ और गुरुकुल परम्परा को पुनर्जीवित करने में सहयोग करें.!!
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩🙏
जय महाकाल🙏🔱🚩
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