सनातन धर्म
देव, दानव, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर, असुर, मानव सबों ने देवाधिदेव महादेव के शरणागत हो भक्ति भाव से इन्हें प्रसन्न कर अपने अभीष्ट को प्राप्त किया है।
भगवान शिव की जिसने भी भक्ति की उन्हें वरदान देने में प्रभु ने कभी कमी नहीं किए, चाहे वर मांगने वाले की मंशा सृजन हो या विनाश कोई अंतर नहीं किए। तभी तो इन्हें औघड़दानी कहा जाता है।
ये सदैव अपने भक्तों को पाप, शाप, व संताप से मुक्ति दिलाए हैं।
इसलिए इनके भक्तों ने इनके विग्रह को अपने सुविधा अनुसार सभी स्थानों पर स्थापित किए हुए हैं।
परमपिता परमेश्वर भगवान शिव का दुर्लभतम विग्रह और शिवलिङ्गम सुदूर सघन वन के मध्य स्थापित है।
यह अनुपम विग्रह कलहट्टी झरना (निकट), कलाठिगिरी, चिकमंगलूर जनपद, कर्नाटक में स्थापित है।(चित्र-साभार)
भगवान शिव के विग्रह के शिल्पकला की निपुणता और प्रवीणता आश्चर्यचकित करते हैं।
नागनाथ, रुद्राक्ष, भगवान की जटा, उंगलियों आदि को कितने उत्कृष्टता और स्पष्टता से निर्मित किया गया है।
यहाँ का दृश्य कितना दिव्य और दुर्लभ है।
इस शान्त निरवता में भी एक अलौकिक ऊर्जा का प्रवाह स्पष्ट अनुभव किया जा सकता है।
अतुलनीय सनातन धरोहर....!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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