सनातन धर्म
बाल्यकाल में वामपंथियों और कांगियों के सनातन धर्म के प्रति द्वेष और घृणा का कुछ पता नहीं चला।
हमने वही पढ़ा जो इन घृणित जीवों ने षड्यंत्र रच के "लुगदी उपन्यास" में लिखा और इसे ही भारत का प्राचीन इतिहास कहा।
इन लोगों ने आर्यावर्त गौरवशाली इतिहास को छुपा कर इसे 'जंगली और संपेरों' का देश लिखा।
संलग्न चित्र श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, कर्नाटक में बने लड़ियों का है।(चित्र-साभार)
यदि आर्यावर्त के लोग "तथाकथित आदिमयुग" के मानव थे तो उन्होंने यह अकल्पनीय, अविश्वसनीय निर्माण कैसे किए.??
यह ध्यान रखें कि सम्पूर्ण निर्माण एक ही ग्रेनाइट के पाषण शिला पर किया गया है।
ध्यान रखें, ग्रेनाइट प्रस्तर का कठोरतम चट्टान है। MOH'S scale पर इसकी कठोरता ८ है जबकि सबके कठोर हीरे की १० है।
इतनी कठोरता होने पर भी ये सभी कलाकृतियां बिना किसी विद्युत चालित यंत्रों द्वारा मात्र मानव हाथों से किस प्रकार बनाया गया होगा यह आश्चर्य चकित करता है।
क्या समकालीन विश्व के किसी भी अन्य देशों में ऐसा निर्माण ये वामपंथी दिखा सकते हैं.??
क्या इसे सनातनी शिल्पकारों के "चमत्कार" के अतिरिक्त कुछ और नामकरण किया जा सकता है.!!!
इस निकृष्ट वामियों कांगियों पर थूकना भी थूक का ही अपमान होगा।
भव्यतापूर्ण सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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