सनातन धर्म

अतीत जब वर्तमान के लिए स्थान रिक्त करता है तो इस अपेक्षा के साथ काल में विलीन होने जाता है कि जो वर्तमान उससे सत्ता प्राप्ति कर रहा है वह उससे अधिक उन्नत, विकसित, परिष्कृत और उत्कृष्ट सृजनात्मकता अपने आने वाले पीढ़ियों को हस्तांतरित करेगा।

इस वस्तुशिल्पों को zoom करके देखें.!!
(सभी चित्र-साभार)

ये निर्माण हमारे अतीत के सनातनी पूर्वजों ने अपने कला के प्रति अखण्ड समर्पण से निर्मित कर वर्तमान के सनातनी संततियों के लिए छोड़ गए हैं।

ये द्रविड़ शैली का निर्माण चौदहवीं शताब्दी का है।

श्री सोमेश्वर महादेव मन्दिर, कर्नाटक।

वर्तमान में.....

क्या हमारी शिक्षा व्यवस्था ने हमें इतना शिक्षित किया कि हम इसकी अनुकृति भी बना सकें.???

क्या हम अपने अतीत के पूर्वजों से उन्नत, विकसित, परिष्कृत, उत्कृष्ट और संस्कार से परिपूर्ण समाज का निर्माण कर पाए.???

अवश्य चिंतन करें.!!
कि कथित "स्वाधीनता" के उपरांत जिन लोगों के हाथों में राष्ट्र निर्माण के बागडोर को सौंपा उन्होंने हमें किस राह पर चलाया.??? हमने क्या प्राप्त किया.???

जिस लोकतंत्र का झुनझुना थाम कर राजनैतिक मानवभक्ति में मनोरोगी बन हीनू रास टर्र का तान छेड़ रहे उसने क्या दिया.??

क्या ऐसे कथित लोकतंत्र से किसी उन्नत संस्कारित समाज की आधारशिला रखा जा सकता है.??

कभी समय मिलेगा तो अवश्य ही विचार करना....!!!

आपके विचार से ही आपकी आने वाली संतति के सवर्णिम भविष्य का मार्ग प्रशस्त होगा.!!!

वैभवशाली अमूल्य सनातन धरोहर....!!

अपने सनातनी मन्दिरों को केंद्र सरकार के नियंत्रण से मुक्त करवाने और पुनः गुरुकुल परम्परा को पुनर्जीवित करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ.!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩

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