सनातन धर्म
वामी, कामी और लहरू गैंग के निकृष्ट दोपाया पशुओं ने आर्यावर्त को सँपेरों, असभ्य जंगलियों का देश प्रमाणित करने का हर सम्भव प्रयास किया।
परन्तु सत्य तो धरती-आकाश को भी चीर कर प्रकट होने का सामर्थ्य रखता है।
उन्हें बता दें कि जब उनके बौद्धिक वृद्ध प्रपितामह वर्णमाला के अक्षर सिख रहे थे..
उस समय हमारे वैदिक सनातन धर्म के पूर्वजों ने अकल्पनीय पाषाण शिल्प कला के साक्षात प्रमाण निर्माण कर हम सनातनी वंशजों के लिए विरासत में छोड़ गए हैं।
जिन पर हमें अभिमान, घमंड, गर्व है।
ये निकृष्ट पशु कहते हैं कि नारी का सनातन संस्कृति में सम्मान नहीं था।
अरे मूढ़.!! नारी सम्मान के इस प्रत्यक्ष प्रमाण को देख।
इस मन्दिर के पाषाण शिल्प में नारी केश-विन्यास के ६० रूपों को पत्थरों पर उकीर्ण किया गया है।
सभी मूर्तियाँ जीवन्त प्रतीत होते हैं।
और कोई भी एक मूर्ति दूसरे से नहीं मिलती हैं।
और हाँ, यह निर्माण आज का नहीं सहस्रों वर्ष पूर्व का ही है।
यह प्रमाणित करता है कि जिसे आधुनिकता में "FASHION" कहते हैं वह उत्कृष्ट रूप में प्राचीन काल में ही नारी सौंदर्य का सनातन संस्कृति का एक अवयव रहा है।
ये सभी मूर्तियाँ श्री चेन्नाकेशवा मन्दिर, हलेबिदु, बेलूर, कर्नाटक में है।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय श्री लक्ष्मीनारायण🙏🙏🙏
जय सनातन धर्म🔱🚩🔱
Comments
Post a Comment