सनातन धर्म
अकल्पनीय को साकार करने की शिल्पकला सनातनी पूर्वजों के ही सामर्थ्य में था और उन्होंने इसे निर्माण कर एक धरोहर के रूप में हमारे लिए छोड़ गए हैं।
यह दुर्लभ शिल्पकला व झरोखा किसी काष्ठ खण्ड पर नहीं अपितु पाषाण पर निर्मित है।
झरोखे का पल्ला भी पाषाण से ही निर्मित है।
किन्तु इन अतुलनीय अद्भुत निर्माण कार्य को हमारे इतिहास में स्थान नहीं मिला क्योंकि "लहरू गैंग व वामी इतिहासकार" को सनातन संस्कृति से बैर और घृणा रहा है।
यह अद्वितीय निर्माण "काशीराज काली मन्दिर" वाराणसी, उत्तरप्रदेश में निर्मित है।
'काशीराज काली मन्दिर' काशी नरेश की व्यक्तिगत सम्पत्ति है और पर्यटकों दर्शनार्थियों के लिए लगभग गुप्त ही है।
इस पाषाण झरोखे में लीलाधर श्री कृष्ण के द्वारा यमुना जी के तट पर वस्त्र चुराने की कथा जीवन्त रूप में प्रदर्शित किया गया है।
अहा.!! मनोहारी दृश्य।
कन्हैया कदम्ब के डाल पर गोपियों के वस्त्र ले बैठे हैं और गोपियाँ वस्त्र प्राप्ति के लिए कान्हा से मनुहार कर रही हैं।
ध्यान रखें कि हमारे सनातन धर्म के मन्दिर उत्कृष्ट कलाकृतियों के भण्डार हैं।
आवश्यकता है कि इन्हें जनसमान्य से परिचय कराया जाए।
दुर्लभ सनातन धरोहर...!!
अपने सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ और गुरुकुल परम्परा के पुनर्स्थापना हेतु सहयोग करें.!
जय लीलाधर..!! जय गोपाळ..!!🙏
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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