सनातन धर्म
सनातनी शिल्पकारों के हाथों के स्पर्श मात्र से पाषाण शिला भी बोलने लगते हैं।
ये प्रस्तर शिला खण्ड भी गौरवपूर्ण ऐतिहासिक गाथा को सुना रहे हैं।
इस पाषाण खण्ड में कुरुक्षेत्र के महाभारत की महत्वपूर्ण कथा उकीर्ण हैं।
(चित्र-साभार)
एक ओर (बाएँ) पांडवों की सेना है जिसका नेतृत्व कौन्तेय अर्जुन कर रहे हैं और उनके रथ के सारथी द्वारकाधीश हैं।
वहीं दूसरी ओर (दाएँ) कौरवों की सेना है जिसका नेतृत्व राधेय कर्ण कर रहे हैं और उनके रथ के सारथी मार्द्र नरेश हैं।
इस रचना में कर्ण के रथ का पहिया भूमि में धंस गया है।
और कर्ण उसे निकालने के लिए प्रयत्नशील है।
यहाँ कर्ण निःशस्त्र है।
उधर अर्जुन अपने गाण्डीव पर वाण चढ़ा कर आक्रमण को उद्यत हैं।
कर्ण अर्जुन को सम्बोधित हो आग्रह कर रहा है कि वह निःशस्त्र है अतः युद्ध-नीति के अनुसार अर्जुन को वाण नहीं चलाना चाहिए।
दोनों ओर के सैनिक युद्धरत हैं।
कितने अद्भुत व दुर्लभ रूप में यह सम्पूर्ण कथा इस शिला खण्ड पर निर्माण किया गया है।
देखकर अचम्भा और रोमांच होता है.!!
सनातनी शिल्पकारों के कला के समक्ष मस्तक नत हो जाता है.!!
सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ.!!
वैभवशाली सनातन धरोहर..!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय चक्रधारी श्री कृष्ण🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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