सनातन धर्म
नब्बे का दशक और कश्मीरी सनातनियों का भोगा हुआ रक्तपात आज भी आँखों से अश्रुधारा बहाने के लिए पर्याप्त है।
क्या कोई उस अमानवीय अत्याचार को जीवनपर्यन्त भूल सकता है जब मलेच्छों ने सनातनियों के रक्त से श्रीनगर के सड़कों को रंग दिया था।
उन सनातनियों के मर्मान्तक पीड़ा का अनुमान सहज लगाया जा सकता है जब म्लेच्छों ने उनके आराध्य देव को अपमानित कर अपवित्र किया था।
उस समय जिन १८ मन्दिरों को अपवित्र, क्षतिग्रस्त, ध्वस्त, विखण्डित किया गया था उनमें से एक यह भगवान शिव का मन्दिर भी है।
यह भग्न महादेव मन्दिर रैनावाड़ी (मूल नाम - राजानक वाटिका), श्रीनगर, कश्मीर का है।
(चित्र-साभार)
मन्दिर ही नहीं प्रभु के शिवलिङ्ग तक को भी क्षतिग्रस्त किया गया था।
यह प्राचीन मन्दिर कभी अपने विशिष्टता के लिए सुविख्यात था परन्तु विधर्मियों के कुकर्मों के कारण आज परित्यक्त सा है।
इन सब के पश्चात भी क्या कोई "भाई-चारा" का नारा लगाया जा सकता है.???
क्या यह माना जाएगा कि सबका डीएनए एक है.??
वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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