सनातन धर्म
हरिश्चंद्रगढ़ उस स्थल पर है जहाँ ठाणे, पुणे और अहमदनगर जनपद (महाराष्ट्र) की सीमाएँ मिलती हैं।
हरिश्चंद्रगढ़ का इतिहास अतिप्राचीन है।
यहाँ सूक्ष्म पाषाणिकमानव अवशेष मिले हैं।
अग्निपुराण, मत्स्यपुराण व स्कन्दपुराण में हरिश्चंद्रगढ़ के संदर्भ मिले हैं।
मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति छठी शताब्दी में कलचुरी वंश के शासन काल में हुई व हरिश्चंद्रगढ़ किले का निर्माण इनके द्वारा ही कराया गया।
इसके कन्दराओं में शिल्पकला व कलाकृति का निर्माण ग्यारहवीं शताब्दी में हुआ।
यहाँ इनके चट्टानों को तारामती, रोहिताश्व नामकरण किया गया है किन्तु इसका सम्बन्ध अयोध्या से नहीं है।
महान ऋषि चांगदेव जिन्होंने तत्वसार ग्रन्थ की रचना की, चौदहवीं शताब्दी में यहाँ ध्यान करते थे।
हरिश्चंद्रेश्वर मन्दिर अतिदुर्लभ व अकल्पनीय सनातन वास्तुशिल्प का आदर्श उदाहरण है।
(चित्र-साभार)
यह सम्पूर्ण मन्दिर आश्चर्यजनक रूप से एक ही पाषाण शिला से निर्मित है।
मन्दिर का शीर्ष उत्तर-भारतीय मन्दिरों के शैली में निर्मित है।
यह आधार से शीर्ष तक १६ मीटर ऊँचा है।
कहा जाता है कि मङ्गलगङ्गा नदी यहाँ के एक सरोवर से निकलती है।
यह मन्दिर प्राचीन आर्यावर्त में प्रचलित पाषाण मूर्तिकला व मन्दिर निर्माण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
अब यह मात्र पर्यटन स्थल ही है।
धार्मिक कार्यकलाप नगण्य ही हैं।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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