सनातन धर्म
यह देखकर अत्यंत पीड़ा होती है कि दूसरी शताब्दी का शिवलिङ्ग दो सहस्राब्दी व्यतीत होने के पश्चात भी ऐसी स्थिति में है।(चित्र-साभार)
सभी सनातनी को अविलम्ब इसके मन्दिर निर्माण व सुरक्षा संरक्षण का उपाय करना चाहिए क्योंकि यह ऐतिहासिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण प्राचीन स्थल हैं।
वैसे तो इस स्थल को ASI अपने हाथों में ले लिया है पर आज भी यह शिवलिङ्ग एक मन्दिर की बाट जोह रहा है।
नंदा गांव में पुरातात्विक दृष्टिकोण से यह अतिप्राचीन शिवलिङ्ग बहुत महत्वपूर्ण हैं।
राजस्थान के मध्य स्थित तीर्थ राज पुष्कर का नंदा सरस्वती संगम स्थल इसे महत्वपूर्ण बनाते हैं।
इस शिवलिङ्ग को कुषाण काल (दूसरी - तीसरी शताब्दी) का माना जाता है।
भगवान शिव का लकुलीश अवतार इस चतुर्भुज सर्वतोभद्र शिवलिङ्ग पर उत्कृष्ट शिल्प कौशल के माध्यम से उत्कीर्ण है ।
सणाल कमल, चक्रधारी श्री विष्णु, माँ लक्ष्मी, हलधर बलराम, सूर्यदेव सहित इस शिवलिङ्ग पर कुल तैंतीस कोटि देवताओं की मूर्तियाँ उकीर्ण हैं।
यहाँ पहुँचने के लिए पुष्कर से गोविंदगढ़ सड़क पर स्थित नंद गांव जाना पड़ता है।
अद्भुत सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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