सनातन धर्म
विश्व के सभी सातों आश्चर्य (seven wonders) जिसके चौखट पर आकर अपने दम तोड़ देंगे,
ये वो अकल्पनीय सनातन संस्कृति की सर्वोत्कृष्ट कृति है।
(Zoom करके अवश्य देखें)
यह सनातनी शिल्पकार पूर्वजों के कर कमलों द्वारा मध्यकाल दसवीं शताब्दी में निर्मित माना जाता है।
(चित्र-साभार)
यह कभी देवाधिदेव महादेव का भव्य मन्दिर हुआ करता था। किन्तु अब मन्दिर के कोई चिह्न विद्यमान नहीं हैं।
अपने सनातनी पूर्वजों के वास्तुशिल्प को देखकर एक बात स्पष्ट है कि जहाँ विश्व के वास्तुशिल्प की कल्पना का अन्त होता है वहीं से हमारे सनातनी वास्तुशिल्प का सृजन आरम्भ होते हैं।
अठारहवीं शताब्दी में धौलपुर के शासक ने भग्न मन्दिर के पत्थरों को अपने भवन निर्माण के लिए उपयोग कर लिए।
अब इस अद्वितीय मन्दिर के मात्र प्रवेश मण्डपम ही बच रहे हैं।
ये गढ़ी पदावली, मोरेना, मध्यप्रदेश में स्थित हैं।
इसके आधार से छत तक सम्पूर्ण भीत मूर्तियों, कलाकृतियों, बेल-बूटों की संरचनाओं से भरे पड़े हैं।
इनमें त्रिदेव, सृष्टिकर्ता श्री ब्रह्मदेव, पालनकर्ता श्रीमन्नारायण, सृष्टि के संचालके व संहारक देवाधिदेव महादेव अप्रतिम रूप से निर्मित हैं।
इनमें जो महान सनातन ग्रन्थ पाषाण पर लिखे गए हैं उस गौरवगाथा को पढ़ने के लिए दिव्य ज्ञान की आवश्यकता है।
प्रवेश द्वार पर ही सिंह और सिंहनी की मूर्तियाँ गढ़ी हुई हैं।
यह मन्दिर तो ध्वस्त कर दिया गया है और अब मात्र प्रवेश मण्डपम ही शेष बचे हैं, परन्तु इस प्रवेश मण्डपम की भव्यता यह कल्पना करने को पर्याप्त है कि अपने यौवन काल मे यह सम्पूर्ण मन्दिर कितना सौन्दर्यपूर्ण और वैभवपूर्ण रहा होगा।
गौरवशाली भग्न सनातन धरोहर...!!
ॐ नमः परम् शिवाय 🚩
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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