सनातन धर्म

सनातनी हिनूओं का दुर्भाग्य देखिए कि इसने जिसको भी मत (वोट) देकर दिल्ली का सिंहासन सौंपा वह सिंहासन का भरपूर आनन्द उठाया। किन्तु सनातनी वीर और वीरांगनाओं के शौर्य को सम्मानित करने के स्थान पर "विश्वासीकरण" में ही लगा रहा। फिर वो तुष्टिकरण सिरमौर कांगी हो जिसने ५६ साल राज किया या हिनुवादी/रास टर्र वादी पार्टी जिसने १५ साल राज किया और आज भी सिंहासन पर है।

यह परित्यक्त स्थल महान मराठा वीरांगना व छत्रपति शिवाजी महाराज की बहू "रानी ताराबाई" की है।(चित्र-साभार)

रानी ताराबाई प्रथम मराठा वीरांगना थी जिन्होंने उत्तर में छापे मारकर म्लेच्छ विधर्मी मलेच्छ मुगल औरंगजेब को पराजित किया और उस आततायी से मालवा के नगरीय क्षेत्रों को जीत लिए।

आज सनातनी मन्दिरों के चढ़ावे व सनातनी के कर (टैक्स) से पुरातत्व विभाग विधर्मी लुटेरे औरंगजेब के महल के पुनर्निर्माण में धन व्यय करने में व्यस्त होता है परन्तु उसे इन वीरांगना की जीर्ण शीर्ण समाधि स्थल नहीं दिखाई देता है।

केंद्र और राज्य दोनों ही स्थानों डबल इंजन वाली कथित हीनू-वादी/रास टर्र वादी पार्टी का राज रहा है।

किन्तु उन्हें ह.ज हाउस बनवाने की व्यस्तता में इस सनातनी धरोहर को देखने का समय ही नहीं मिलता।

कितना दुर्भाग्यपूर्ण विडम्बना है इन सनातनी वीर/वीरांगनाओं का की एक ओर उन्हें इतिहास में स्थान नहीं मिला और दूसरी ओर उनके स्मृति स्थलों की यह दुर्दशा है।

ऐसा केवल इनके साथ ही नहीं हुआ है, और भी हैं, यथा - राणा सांगा, पेशवा बाजीराव आदि..! सबों के समाधि स्थल का यही हाल है।

उन्हें तो आक्रमणकारियों को महिमामण्डित करने में ही आनन्द मिलता है।

यह हम सनातनियों का शौर्यपूर्ण गौरव हैं। इसके जीर्णोद्धार हेतु इस गौरवगाथा को सभी सनातनियों तक पहुँचाने में सहयोग करें.!!

जयतु सनातन 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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