सनातन धर्म

ये सभी संलग्न चित्र मात्र भवन/मन्दिर/राजप्रासाद/मठ नहीं हैं अपितु हमारे सनातनी पूर्वजों द्वारा पाषाण शिला पर लिखा हुआ इतिहास है जिसे वामियों/लहड़ू गैंग ने हमारे ही पाठ्य पुस्तकों से विलुप्त कर दिया। (सभी चित्र - साभार)

इसमें दोष जितना उनका है उतना ही सनातनियों का भी है।

जब हम ही अपने वास्तविक शौर्य पराक्रम वाले "नायक" के यशोगाण को भुला कर छद्म (kripto) नायकों का गुणगान करने लगे।

आज पुष्यमित्र शुंग कितने को याद है.? जबकि अशोक बच्चे बच्चे को पता है।

आज महर्षि दाधीच के त्याग को कितने लोग जानते हैं.? जबकि किसी छद्म NGO के CEO को त्याग की प्रतिमूर्ति प्रचारित किया जाता है।

जिन लोगों को हम चुन कर देश का भाग्य विधाता बना दिया वे भी अपने स्वार्थ में आर्यावर्त को हरिश्चन्द्र, शिवि, रघु, ऋषभदेव,  विक्रमादित्य, राम, कृष्ण आदि का नहीं कह कर गांदी/बूध का कह कर देश विदेश में घूमता रहता है।

कभी आपने सोचा है कि हमारे पुस्तकों में जितने सम्राटों समुद्रगुप्त/ चद्रगुप्त प्रथम/ चंद्रगुप्त मौर्य/ बिम्बिसार/ जरासंध आदि आदि और इन जैसे ही असंख्य के राज्य और राजकाज दोनों ही के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है पर उनका महल/ राजप्रासाद कहां गया.??

वास्तविकता यह है कि रेगिस्तानी पशुओं के आक्रमण करने और इस भूभाग पर शासन करने के कारण जो महल राजप्रासाद सनातनी नरेशों/ सम्राटों/ महाराजाओं का था उस पर ही इन पशुओं ने अपना "नाम पट्टिका" चिपका लिया।

और वामी इतिहास लेखकों ने उसे ही सत्य कह दिया।

आज भी अधिकांश हिनू "सिकुलरिज्म" की अफ़ीम चाट कर भ्रम में ही जी रहे हैं।

शुद्ध सनातनी तो अल्पसंख्य है वह चाह कर भी कुछ नहीं कर सकता.!

जागिए और अपने वास्तविक नायकों को उचित सम्मान दें।

अपनी संतति को उन महान नायकों के शौर्य पराक्रम की गाथा बताएँ जिससे पुनः गौरवशाली परंपरा की पुनर्स्थापना हो सके.!

कभी समय मिले तो चिंतन करना कि क्या इन सभी की प्रतिकृति को बनाना आज के आधुनिक काल में भी सम्भव है.??

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🌺🚩

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