सनातन धर्म
सम्पूर्ण विश्व में श्री मारुतिनन्दन महावीर स्वामी जी को अखण्ड ब्रह्मचारी के रूप में ही पूजा जाता है।
विश्व भर के मन्दिरों में श्री आञ्जनेय हनुमानजी की एकल प्रतिमाएँ ही स्थापित हैं।
किन्तु क्या आप जानते हैं कि श्री हनुमान जी विवाहित ब्रह्मचारी हैं.???
आश्चर्य हुआ न...!!!
आईए श्री हनुमान जी के इस पाणिग्रहण कथा को जानते हैं.!!!! इसका सम्पूर्ण वर्णन "पराशर संहिता" में उल्लिखित है।
श्री हनुमान जी ने अपने गुरू के रूप में श्री सूर्यदेव को वरण कर उनके शरण में विद्याध्ययन के लिए गए थे।
श्री हनुमान जी ने अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत का प्रण ले लिया था।
अब, श्री सूर्यदेव तो सतत चलायमान हैं तो श्री हनुमानजी जी उनके संग चलते हुए ही शिक्षा ग्रहण करने लगे।
शिक्षा ग्रहण करते हुए नौ विद्याओं में पाँच विद्याओं को श्री हनुमान जी ने पूर्णता से ग्रहण कर पारंगत हो गए।
अन्य चार विद्याओं के प्राप्ति के लिए विवाहित होना आवश्यक था।
अब धर्म संकट दोनों के ही समक्ष उत्पन्न हो गया क्योंकि प्रण के अनुसार श्री हनुमान जी विवाह नहीं करेंगे और श्री सूर्यदेव विद्या दान के अनुशासन को तोड़ नहीं सकते।
श्री सूर्यदेव धर्मसंकट में पड़ चिंतन करने लगे क्योंकि श्री हनुमान जी ने तो अखण्ड ब्रह्मचर्य व्रत का प्रण लिया था, और वे अपनी शिक्षा को भी सम्पूर्णता से ग्रहण करने को प्रतिबद्ध थे।
अत्यंत चिंतन के उपरांत श्री सूर्यदेव ने इस समस्या का निदान ढूँढ लिए और श्री हनुमान जी के समक्ष अपनी परम् तपस्विनी और यशस्विनी पुत्री सुवर्चला से विवाह करने का प्रस्ताव दिए।
श्री हनुमान जी ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिए और "श्री हनुमान संग देवी सुवर्चला" का विवाह सम्पन्न हुआ।
विवाह के उपरांत देवी सुवर्चला अविलम्ब अपने तपश्चर्या के लिए प्रस्थान कर गईं, श्री हनुमान जी के विद्या ग्रहण के लिए विवाह की भी आवश्यकता पूर्ण हुई और वे अखण्ड ब्रह्मचारी भी रह गए।
इस प्रकार श्री मारुतिनन्दन ने अपना विद्याध्ययन पूर्ण कर लिए।
श्री मारुतिनन्दन का सपत्नीक प्रतिमा येल्नाडू ग्राम, खम्माम जनपद, तेलंगाना राज्य में श्री मारुति मन्दिर में स्थापित है। सम्भवतः यह एक मात्र मन्दिर है जिनमें श्री आञ्जनेय अपने पत्नी के साथ विराजमान हैं।
ऐसी मान्यता है (और प्रमाण भी) कि विवाह-विच्छेद की परिस्थितियों में यदि पति-पत्नी इस मन्दिर में पूजा अर्चना कर श्री मारुतिनन्दन व देवी सुवर्चला का आशीर्वाद लेते हैं तो उनका गृहस्थ जीवन सुख-शान्ति से व्यतीत होता है।
इस मन्दिर में इस समस्या के समाधान के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं।
अद्वितीय सनातन धरोहर...!!
जय आञ्जनेय महावीर स्वामी जी🙏🌺
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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