सनातन धर्म
आधुनिक तकनीक.................नहीं. नहीं.!!
आधुनिक शिक्षा.....................नहीं. नहीं.!!
आधुनिक विज्ञान...................नहीं. नहीं.!!
ग्राफिक्स..............................नहीं.नहीं.!!
सॉफ्टवेयर...........................नहीं. नहीं.!!
आधुनिक यन्त्र......................नहीं. नहीं.!!
तो भी सहस्रों वर्ष पूर्व हमारे पूर्वजों ने कई फीट ऊँचे मन्दिरों के भीतरी छतों में अपने शिल्पकुशलता से दुर्लभतम शिल्प निर्माण किए जो आज के तथाकथित "मॉडर्न इंजीनियर्स" को लज्जित कर देने के लिए पर्याप्त है।
क्या आज आधुनिक विज्ञान और तकनीकों का उपयोग कर के भी इसकी अनुकृति का निर्माण करना किसी से सम्भव है.????
सोचकर देखें.!!
हम सांस्कृतिक और कलात्मक रूप से आदिकाल से ही समृद्ध रहे हैं।
यह निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा के अनुग्रह और आशीर्वाद के बिना सम्भव ही नहीं हो सकता है।
ऐसा शिल्प निर्माण वही लोग कर सकते हैं जो गहरे हृदयतल पर भक्तिभाव से लबालब भरा हुआ हो.!! ओत-प्रोत हो.!
ऐसे भक्तिभाव की प्राप्ति किसी व्यक्ति प्रदत्त पंथ में उत्पन्न ही नहीं होगा।
इसके लिए प्रकृति प्रदत्त सनातन धर्म के शरण में आना ही होगा।
जिस प्रकार हरे भरे उपवन में उसके सौंदर्य को विद्रूप करने को अवांछित खर-पतवार जन्म ले लेता है उसी प्रकार सनातन संस्कृति के सौंदर्य को नष्ट करने हीनू नामधारी दोपाया वामी/सिकुलर/लिब्रांड पशु उत्पन्न हो जाता है।
ये निकृष्ट जीव राजनीतिक संस्थानों में अपना खाद-पानी पाता है और बलिष्ट होकर सनातन संस्कृति के जड़ो को ही काटता है।
यहाँ भी ये वामपंथी इतिहासकार चरण चाटुकरिता और राजनीतिक प्रश्रय के कारण इतने सामर्थवान थे की कभी हमें हमारी सांस्कृतिक विरासत से परिचय ही नहीं होने दिया।
केवल भूखा और दासत्व वाला आर्यावर्त विश्व को दिखाया गया और विश्व समुदाय के समक्ष हमें लज्जित करने का षड्यंत्र रचा गया।
परन्तु अब परिस्थिति में बदलाव आया है।
लोग अपने गौरवशाली अतीत के प्रति जिज्ञासु और जागरूक हो रहे हैं।
सोशल मीडिया भी इसमें सहयोग कर रहे हैं।
धन्यवाद है उनलोगों का जो सनातनी पूर्वजों के गौरवान्वित अनमोल कृतियों को जनसामान्य तक पहुँचाने में सहयोगी हो रहे हैं।
गौरवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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