सनातन धर्म

देवाधिदेव महादेव काल परिवर्तन से परे हैं इसलिए महाकाल हैं।

भगवान शिव अपने हाथ में त्रिशूल धारण किए हुए हैं।

त्रिशूल त्रिक का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह त्रिशूल हमें बताते हैं कि...

चेतना की तीनों अवस्थाएँ "जाग्रत, स्वप्न व सुसुप्त" ब्रह्माण्ड के तीनों तत्व "सत, रज व तम" कुण्डलिनी की तीनों नाड़ियाँ "सुषुम्ना, पिंगला व इड़ा"  ये सभी परमपिता त्रिशूलधारी के वश में ही है।

भूत वर्तमान और भविष्य सभी इनके ही नियंत्रण में है।

त्रिशूल बताते हैं कि  ब्रह्माण्ड में जो कुछ भी सात्विक, राजसिक व तामसिक है सभी भगवान शिव के ही नियंत्रण में हैं।

त्रिशूल बताते हैं कि तीनों लोकों आकाश, भूलोक व पाताल का संचालन निष्पादन भगवान भोलेनाथ के द्वारा निर्धारित किया जाता है।

त्रिशूल बताते हैं कि देव, मानव व दानव सभी उन दयानिधि भगवान नीलकण्ठ के अनुग्रह प्राप्ति के लिए ही सतत प्रयत्नशील रहते हैं।

बाबा केदारनाथ धाम का दिव्य त्रिशूल, श्री केदारनाथ धाम मन्दिर, केदारनाथ धाम, उत्तराखंड।
(चित्र-साभार)

अद्भुत सनातन धरोहर...!!

ॐ नमः परम् शिवाय 🚩

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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