सनातन धर्म

सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में सृजन और संहार यह दो क्रियाएँ अनवरत चलते रहते हैं।

जो कुछ भी सजग, सचेत, प्रकृति से तारतम्य मिला कर नहीं चलता है उसका विनाश तय हो जाता है।

जीव को जीवन में प्रकृति से तारतम्य मिला कर चलने में, सजग, सचेत रखने में उसका धर्म ही सहायक होता है।

धर्म ही वह संबल प्रदान करता है, वह प्रकाश प्रदान करता है जिसके आलोक में जीव सुख समृद्धि ऐश्वर्य प्राप्त करते हुए अपने आराध्य देव से एकाकार होने के पथ पर उत्तरोत्तर अग्रसर होता है।

धर्म ही जीव को व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक क्षेत्र में एक लयबद्ध संगीत से जोड़ कर उन्नति के मार्ग प्रशस्त कर आगे ले जाता है।

जहाँ धर्म की हानि हो जाती है वहाँ जनजीवन व धर्म स्थलों का पराभव अवश्यम्भावी है।

इस मन्दिर के अद्भुत वास्तुशिल्प को देखें.!! कभी यहाँ भी भक्तों के भीड़ से वातावरण गूँजायमान रहता होगा, किन्तु सनातन धर्म की समाप्ति के साथ ही निस्तब्धता व्याप्त हो गई है।

यह श्री गोविन्द हिन्दू मन्दिर, पुथिया, बांग्लादेश में है।

जब देश ही सनातन धर्म से वंचित है तो मन्दिरों को कौन सँवारेगा.???

अतः धर्म की रक्षा ही परम् कर्तव्य है...

धर्म को समग्रता से धारण करने पर अर्थ और काम सुगमता पूर्वक प्राप्त होता है।

धर्म से च्युत हुए तो विनाश निश्चित है..!

गौरवपूर्ण सनातन के अवशेष...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय सुदर्शन चक्रधारी 🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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