सनातन धर्म

शनैः-शनैः ही सही, सनातनियों को यह भान होने लगा है कि फिरंगी अंग्रेजों ने आर्यावर्त से हमारा मात्र धन ही नहीं लूटा अपितु हमारे सनातनी पूर्वजों के विज्ञान व वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धतियों के प्राचीन आदि-ग्रन्थों को चुराकर, छीनकर और जिस भी प्रकार से हो सकता था, अपने देश ले गया।

उन्होंने हमारी भाषाएँ सीखी और हमारे ग्रन्थों का अंग्रेजी, फ्रांसीसी, डच, आदि में अनुवाद करके हमारे ही ऋषि मुनियों के प्रयोगों, सिद्धांतों व आविष्कारों को अपना बताकर उन्हें "अपना-अविष्कार" का नाम दिया।

जबकि सत्य ये है कि जिन जिन चीजों, पद्धतियों, धारणाओं, व्यवस्थाओं, विज्ञान, भौतिक, बौद्धिकता, खगोलीय, ज्योतिष शास्त्र, चिकित्सीय सन्दर्भो में अंग्रेजों ने अविष्कार करके अपने नाम पेटेंट करवाये, वो सब के सब सहस्रों, लाखों वर्ष पूर्व हमारे सनातनी पूर्वजों, ऋषियों, मुनियों, मनीषियों ने आविष्कृत व निर्माण कर व्यवस्था में ले लिए थे। उन्होंने उनका नामकरण भी कर दिया था।

फिरंगी अंग्रेजों ने केवल अंग्रेजी भाषा में उन उपलब्धियों को पुनर्नामकरण किया और उन कृति-चौर्य का पेटेंट अपने नाम करवाया।

आइए जानें,
हमारे सनातनी पुर्वजों का अनमोल व विलक्षण मानव देह के सूक्ष्म से सूक्ष्मतम वैज्ञानिक ज्ञान व विद्वता का एक उदाहरण।

ये सनातनी पूर्वजों का अद्भुत ज्ञान उस काल का है जब न ईशा और ना ही मूसा का जन्म इस पृथ्वी पर हुआ था अर्थात इस दोनों पन्थों का उस समय कोई अस्तित्व ही नहीं था।

सनातनी पूर्वजों के दिव्य दृष्टि और दिव्य ज्ञान का प्रत्यक्ष प्रमाण :-

ये गर्भस्थ शिशु की प्रस्तर प्रतिमा कुंद्दम वादक्कुनाथ स्वामी मन्दिर, कोयम्बटूर, तमिलनाडु की एक भीत पर उकेरी हुई है।

कल्पना करें X-RAY के आविष्कार से सहस्रों वर्ष पूर्व ये ज्ञान उस समय के सनातनी मनीषियों को कैसे प्राप्त हुआ होगा.???

जैसा कि पाठ्य पुस्तकों में लिखा है, X-ray का आविष्कार German Physicist Wilhelm Conrad Roentgen ने 8th November 1895 में किया और ठीक इसके पचास दिन उपरांत इसका रिसर्च पेपर 28th December 1895 को विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया।

उसी प्रकार Ultrasound का आविष्कार 1950 के दशक में Engineer Tom Brown और Obstetrician Ian Donald के द्वारा किया गया और इसका प्रथम प्रयोग Glasgow में 1956 में किया गया।

अब आपको सोचना है कि जो कथित आविष्कार/खोज उन्नीसवीं/बीसवीं शताब्दी में आधुनिक काल के विज्ञानियों द्वारा किया गया उससे सहस्रों वर्ष पूर्व इसका सटीक और प्रमाणिक पाषाण चित्रण सनातनी मनीषियों ने कैसे किया था.??

मन्दिर के अन्य भीत पर भी गर्भस्थ शिशु के प्रत्येक माह के स्थिति की प्रतिमा उकेरी हुई है।

इसीलिए किसी भी भ्रम व दुविधा में नहीं पड़ कर यह जान लें कि सनातन धर्म संसार का सबसे प्राचीन प्रथम और एकमात्र वैज्ञानिक धर्म है.!!

सनातन ने ही विश्व को ज्ञान दिया.!!
दृष्टि दी.!!
जीवन जीने की कला दी.!!
सहित्य दिया.!!
संस्कृति दी.!!
विज्ञान दिया.!!
विमान शास्त्र दिया.!!
चिकित्सा शास्त्र दिया.!!
अर्थ शास्त्र दिया.!!
आयुर्वेद दिया.!!
धातुशास्त्र दिया.!!
गणित दिया.!!
और क्या नहीं दिया....!!!!

सनातन धर्म आदि काल से वैज्ञानिक अनुसंधान करता आया है।

हमारे ऋषि मुनियों ने विज्ञान की नींव रखी है।

सनातनी ऋषियों ने अपनी अस्थियाँ गलाकर संसार को विज्ञान ओर अनुसंधान के दर्शन कराए हैं।

सम्पूर्ण विश्व कभी सनातनी ऋषी मुनियों के ऋण से मुक्त नहीं हो पाएँगे।

गर्व से मस्तक ऊँचा कर कहता हूँ..
हाँ.!! मैं उन्हीं वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों का वंशज शुद्ध सनातनी हूँ.!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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