सनातन धर्म
यह मान्यता है कि रानी की वाऊ (बावड़ी) के सोलंकी शासन के नरेश भीमदेव प्रथम की प्रेमिल स्मृति में उनकी महारानी "रानी उदयमति" ने वर्ष १०६३ ई. में बनवाया था।
रानी उदयमति जूनागढ़ के चूड़ासमा शासक राजा खेंगार (खंगार) की पुत्री थी।
सोलंकी राजवंश के संस्थापक मूलराज थे।
राणी की या रानी की बावड़ी यूनेस्को विश्व धरोहर में सम्मिलित है।
राणी की वाऊ गुजरात के पाटन में स्थित है जो अपने अद्वितीय वस्तुशिल्प के कारण विश्व विख्यात है।
यह अतुलनीय आदिवाराह प्रतिमा राणी की वाऊ में निर्मित है।
(चित्र-साभार)
इस प्रतिमा के शिल्पकुशलता को देखिए..!!
आज भी इसकी अनुकृति का निर्माण असम्भव ही प्रतीत होता है।
परन्तु शताब्दियों पूर्व सनातनी पूर्वजों ने किस समर्पण और निपुणता से इसे निर्माण किया है यह सोचकर ही रोमांच होता है।
आदिवाराह भूदेवी को उठाए हुए हैं। उनके हाथों में शङ्ख, सुदर्शन चक्र, गदा शोभायमान हैं।
आदिवाराह के संग ही दशावतार की मूर्तियाँ लागू रूप में पार्श्व में निर्मित हैं।
कितना श्रमसाध्य कार्य रहा होगा उन विशिष्ट शिल्पियों के लिए...
इसी "राणी की वाऊ" की छवि नए सौ रुपये के मुद्रा पर अंकित है।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्रीमन्नारायण 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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