सनातन धर्म

सनातन धर्म के उद्गम को ढूँढना आधुनिक विज्ञान के लिए असम्भव ही है। जिन सनातन परम्परा का विज्ञान आजतक उपहास करता रहा है जब उस व्यवस्था को अपने वैज्ञानिक प्रयोगों द्वारा जाँच करता है तो परिणाम आश्चर्यजनक रूप से शतप्रतिशत वही निकलता है जिसे सनातन परम्परा युगों युगों से पालन करते रहे हैं।

"शङ्ख" सभी सनातनी घरों में पाया जाने वाला एक प्रमुख वस्तु है।

सभी सनातनी शुभ कार्यों में "नाद ब्रह्म" शङ्ख-ध्वनि की अनिवार्यता रहती है।

"शङ्ख" समुद्र मन्थन से प्राप्त एक रत्न है, इसे देवी लक्ष्मी जी के भ्राता का स्थान प्राप्त है।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आधुनिकता के अन्धदौड़ में कुछ लोग सनातनी परम्परा को त्याग रहे हैं।

इस चित्र के पहले भाग में ध्वनि तरंगों के प्रथम नौ ताल/लय (हार्मोनी) का ग्राफ है। चित्र के दूसरे भाग में "नाद-ब्रह्म" शङ्ख का X-ray है।(चित्र-साभार)

दोनों ही चित्र एक रूप और एक समान हैं।

अब सोचिए कि सनातनी पूर्वजों को यह कैसे ज्ञात था कि "शङ्ख भौतिक रूप में ध्वनि तरंगों का घनीभूत रूप है".!!!

यह वैज्ञानिक आधार पर भी प्रमाणित है।

यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ध्वनि तरंगों का ही विस्तार है - "नाद-ब्रह्म" .!!!

कितना विस्मयकारी है कि सनातनी पूर्वजों को आधुनिक भौतिक विज्ञान के सूत्र कितने उत्कृष्ट रूप में वैदिक काल से ज्ञात रहे हैं जिससे उन्होंने शङ्ख को अपने संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका देकर सम्मिलित कर दिए।

आईए, लौटें सनातन धर्म की ओर...!!

विस्मयकारी सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम