सनातन धर्म

आर्यावर्त का दुर्भाग्य देखिए कि इस पर सर्वप्रथम "रेगिस्तानी पशुओं" ने आक्रमण किया जो विध्वंस और दुष्कर्म का पर्याय था। सनातनी कृतियों का विध्वंस और सनातनी नारियों का शीलहरण व हत्या ही इन जंगली पशुओं का मुख्य कार्य था।

इसके पश्चात फिरंगी भेड़िये का आक्रमण हुआ जो पाशविकता में रेगिस्तानी खच्चरों के जैसा ही था किन्तु इसका ध्यान विध्वंस से अधिक कृति-चौर्य की ओर रहा था।

आर्यावर्त में खगोलीय कौशल विकास किस उच्चतम स्तर पर था इसका प्रमाण यह 
"खगोलीय-वेधयन्त्र" है जो खगोलीय माप में प्रयुक्त होने वाला यन्त्र है।(चित्र-साभार)

वर्तमान में यह यन्त्र जेनेवा संग्रहालय के संरक्षित है।

यह खगोलीय वेधयन्त्र चौदहवीं शताब्दी का माना जाता है।

इस खगोलीय वेधयन्त्र पर संस्कृत भाषा में बारह राशियों में नाम स्पष्ट रूप से उकीर्ण हैं।

फिरंगियों के लूट के अतिरिक्त और किसी साधन से यह जेनेवा नहीं पहुँचा हो सकता है।
क्योंकि कोहिनूर हीरे से लेकर अनेकों दुर्लभतम मूर्तियों और अद्वितीय वस्तुओं को फिरंगियों ने चुराकर इस देश से ले गए।

यह ASTROLABE (फिरंगी ने यही नाम दिया है) विश्व के समक्ष प्रस्तुत सनातनी उत्कृष्ट खगोलीय अनुसंधान का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

गौरवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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