सनातन धर्म
प्राचीन कश्मीर के कण-कण शैववाद से ही संचालित रहे थे।
( दुर्भाग्यवश चौदहवीं शताब्दी के पश्चात भले ही यहाँ विधर्मियों का आधिपत्य हो गया।)
भगवान शिव का आशीर्वाद कश्मीर से ही सम्पूर्ण आर्यावर्त में विस्तार पाए।
भगवान शिव के प्रति भक्ति, आस्था और समर्पण मात्र शब्दों में ही नहीं अपितु प्रत्येक निर्माण में दृष्टिगोचर होते हैं।
भगवान शिव को समर्पित यह मन्दिर सत्रह सौ वर्ष प्राचीन है।
भगवान शिव के भक्ति में प्रत्येक निर्माण में चमत्कार किस प्रकार घटित होते हैं ये मन्दिर इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं।
इस अतिप्राचीन शिव मन्दिर के अद्भुत वास्तुकला में चमत्कार स्पष्ट दिखाई देता है।
इसके प्रत्येक आयाम का भार समान रूप में ७.२० टन है।
भार का इतना सटीक गणना करना और उस अनुपात में ही पत्थर को काट कर मन्दिर के भीत का निर्माण कार्य पूरा करना और वो भी बिना किसी त्रुटि के...., क्या यह सामान्य बात है.??
आप स्वयं चिंतन करें.!!!
आधुनिक विज्ञान आज भी सनातन संस्कृति के उच्चतम स्तर को छू भी नहीं पाया है।
यह अतिप्राचीन शिव मन्दिर, पुलवामा, कश्मीर में स्थित है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
ॐ नमः परम् शिवाय 🚩
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
Comments
Post a Comment