सनातन धर्म

प्राचीन सनातनी शिल्प शैली क्या थी इसे वामियाें के लुगदी उपन्यास (कथित इतिहास) को पढ़ कर नहीं जान सकते हैं।

क्योंकि उनके उपन्यास में शिल्प कला में प्रयुक्त यंत्र "छेनी हथौड़ी" तक जाकर ही रुक गया है।

इस मूर्ति के मुखमंडल, वस्त्र, आभूषणों, अलंकरणों के बनावट को ध्यान से देखिए...!!

क्या इसकी कोई तुलना हो सकता है.??

अब उस विशिष्टता की ओर ध्यान दें जो वामियों के कपोल कल्पित कथा की प्रामाणिकता को तार तार कर देगा।

इस मूर्ति के मस्तक में एक कान से दूसरे कान तक एक सूक्ष्म छेद बना हुआ है।

अब इस पर चिंतन करें कि माना बाह्य अलंकरण को "छेनी हथौड़ी" से बना दिया होगा परंतु इस सूक्ष्म छेद को कैसे बनाया गया होगा???

यह भी ध्यान रखें कि ग्रेनाइट की कठोरता Moh's scale पर ८ है जो इसे डायमंड के पश्चात सबसे कठोर पाषाण बनाता है।

और उस काल में इलेक्ट्रिकल ड्रिल मशीन नहीं होता था।

तो यह सूक्ष्म छेद किस विधि, तकनीक से बनाया गया होगा.??

यह मन्दिर नौवीं शताब्दी का निर्माण है जिसमें संगीत स्तम्भ बने हुए हैं जो थाप देने पर सभी सातों स्वरों की ध्वनि सुनाते हैं।

आप इस मूर्ति के निर्माण में प्रयुक्त यंत्र और तकनीकी के विचारों में खोए रहें.... और प्राचीन सनातन शिल्प कला में चमत्कृत/आनंदित होते रहें.!!!

श्री तनुमालयन मन्दिर, सुचिंद्रम, कन्याकुमारी जनपद, तमिलनाडु।(चित्र - साभार)

अकल्पनीय सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🌷🚩
#प्रेमझा

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